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Photo Gallery: साइंस कालेज, दुर्ग में जियोलाॅजिकल सोसायटी उद्घाटित भूविज्ञान विषय में रोजगार की अपार संभावनायें- नीतिश दत्ता

 

साइंस कालेज, दुर्ग में जियोलाॅजिकल सोसायटी उद्घाटित भूविज्ञान विषय में रोजगार की अपार संभावनायें- नीतिश दत्ता


Venue : Govt. V.Y.T. PG Autonomous College, Durg
Date : 14/12/2018
 

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भूविज्ञान विषय में रोजगार की अपार संभावनायें है। खनिज सम्पदा से भरपूर छत्तीसगढ़ प्रदेश जियोलाॅजी के विद्यार्थियों के लिए प्राकृतिक संग्रहालय के समान है। ये उद्गार भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के पूर्व डायरेक्टर जनरल श्री नीतिश दत्ता ने आज शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग में व्यक्त किये। श्री दत्ता आज महाविद्यालय के रवीन्द्र नाथ टैगोर सभागार में आयोजित जियोलाॅजिकल सोसायटी के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बड़ी संख्या में उपस्थित प्राध्यापकों एवं छात्र-छात्राओं को संबोधित कर रहे थे। भूविज्ञान विषय में फील्ड वर्क को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए श्री दत्ता ने आमंत्रित व्याख्यान में छत्तीसगढ़ प्रदेश की जियोलाॅजी पर रोचक एवं ज्ञानवर्धक व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि भूविज्ञान के विद्यार्थियों को हमेशा अपने आसपास की प्रकृति, चट्टानें तथा घट रही प्राकृतिक घटनाओं पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। भूविज्ञान में रोजगार की अपार संभावनाओं की जानकारी देते हुए श्री दत्ता ने उपस्थित विद्यार्थियों को यूपीएससी, पीएससी, ओएनजीसी आदि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में सफलता प्राप्ति हेतु महत्वपूर्ण टिप्स दिए। श्री दत्ता के व्याख्यान के दौरान एन.आई.टी. रायपुर के प्राध्यापक डाॅ. विकल्प सिंह, डाॅ. डी.सी. झारिया तथा डाॅ. रूबिया खान भी उपस्थित थे। 
कार्यक्रम के आरंभ में संचालक डाॅ. प्रशांत श्रीवास्तव ने जियोलाॅजिकल सोसायटी की उपयोगिता एवं उसकी गतिविधियों पर विस्तृत प्रकाश डाला। डाॅ. श्रीवास्तव ने बताया कि श्री नीतिश दत्ता ने लगभग 100 से अधिक पुस्तकें विद्यार्थियों हेतु महाविद्यालय के भूविज्ञान विभाग को भेंट की है। महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. एम.ए. सिद्दीकी ने अपने उद्बोधन में गणित विषय को हर विषय का आधार बताते हुए कहा कि विद्यार्थी गणित से घबराने के बजाय गणित का उपयोग अपने-अपने संबंधित विषयों में व्यवहारिक गणित के माध्यम से करने का प्रयास करें। एक नवजात शिषु द्वारा जन्म से ही गणित का ज्ञान होने का उदाहरण देते हुए डाॅ. सिद्दीकी ने कहा कि अशिक्षित बालक भी यह जानता है, कि दोनांे हाथों में से अधिक संख्या में चाकलेट वाले हाथ की तरफ बढ़ना चाहिए। 
भूविज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. एस.डी. देशमुख ने अपने स्वागत भाषण में जानकारी देते हुए बताया कि 1982 से आरंभ हुए भूविज्ञान विभाग ने छत्तीस वर्षों की अपनी लंबी यात्रा में सफलता के अनेक आयामों को पार किया है। विभाग के अनेक छात्रों ने यूपीएससी, नेट, पीएससी, सेल जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में चयनित होकर अपनी दक्षता सिध्द की है। भूगर्भशास्त्र विभाग के भूतपूर्व छात्र शलभ शाह ने अपने संबोधन में भूविज्ञान विषय को स्वरोजगार हेतु सबसे उपयुक्त बताया। इस अवसर पर भूविज्ञान विभाग के उपस्थित भूतपूर्व विद्यार्थियों में मनीष दुबे, प्रवीण मराठे, भुवनेश्वर कुमार, कोमल सिंह वर्मा, नवीन ताम्रकार, शलभ शाह, मनदीप सिंह, रजनीश तिवारी, विभास हलदर, राम प्रसाद, दुष्यंत आदि उपस्थित थे। मुख्य अतिथि श्री दत्ता ने भूविज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले विद्यार्थियों एवं भूतपूर्व विद्यार्थियों को स्मृति चिन्ह देेकर पुरस्कृत किया। 
कार्यक्रम का आरंभ अतिथियों को पुष्प गुच्छ भेंट करने के साथ हुआ। स्वागत करने वालों में प्राचार्य डाॅ. एम.ए. सिद्दीकी, डाॅ. एस.डी. देशमुख, डाॅ. प्रशांत श्रीवास्तव, डाॅ. अनिल कष्यप, श्री शलभ शाह एवं श्री मनीष दुबे शामिल थे। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन विभागाध्यक्ष डाॅ. एस.डी. देशमुख ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त विभागों के विभागाध्यक्षों के अलावा डाॅ. अभिषेक मिश्रा, श्री दिनेश मिश्रा तथा श्री विजय यादव भी उपस्थित थे। 

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