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Photo Gallery: साइंस कालेज में विष्व मृदा दिवस पर कार्यशाला मिट्टी भी सांस लेती है. अभिषेक कुमार आडिल

 

साइंस कालेज में विष्व मृदा दिवस पर कार्यशाला मिट्टी भी सांस लेती है. अभिषेक कुमार आडिल


Venue : Govt. V.Y.T. PG Autonomous College, Durg
Date : 05/12/2018
 

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विश्व मृदा दिवस 5 दिसंबर के उपलक्ष्य में शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग रसायन विभाग की ओर से छात्र-छात्राओं में साइंस के प्रति रूझान को प्रोत्साहित करने हेतु मृदा परीक्षण पर एक दिवसीय कार्यषाला आयोजित की गयी। महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डाॅ. एम. ए. सिद्दीकी ने कार्यशाला के आरंभ में उपस्थित विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों को संबोधित करते हुए कहा कि प्राचीन काल में परंपरागत खेती के दौरान जमीन की उर्वरता को संरक्षित रखा जाता था। वर्तमान में तकनीकी युग में मृदा में उपस्थित सभी तत्वों की प्रतिशत मात्रा ज्ञात करके हम उसके अनुरूप मृदा को उपचारित करने के साथ-साथ उपयुक्त पैदावार कर सकते है। डाॅ. सिद्दीकी ने कहा कि अंधाधुंध उर्वरकों एवं हानिकारक फर्टिलाइजर के प्रयोग से मृदा को होने वाली हानियों से बचाने की नितांत आवश्यकता है। इस कार्य हेतु उचित तकनीकों का उपयोग लाभप्रद होगा। उन्होंने कार्यशाला के प्रतिभागियों से आग्रह किया कि कार्यषाला के दौरान प्राप्त जानकारी को अपने-अपने अंचलों में जाकर कृषकों एवं अन्य संबंधित जनों के बीच प्रसारित करें तभी यह कार्यशाला सही अर्थो में सफल सिध्द होगी। डाॅ. सिद्दीकी ने रसायन शास्त्र विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यशाला को छात्र-छात्राओं के लिए व्यवहारिक रूप से उपयोगी निरूपित करते हुए अन्य विभागों के लिए भी इसे अनुकरणीय बताया।
शासकीय मृदा परीक्षण प्रयोगषाला दुर्ग के श्री अभिषेक कुमार आडिल, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी एवं प्रयोगशाला सहायक श्री संजीव जेना ने मृदा परीक्षण के संबंध में महत्वपूर्ण तथ्य पर प्रकाष डालते हुये प्रयोग करवाये। व्यवहारिक रसायन से संबंधित इस कार्यशाला में प्राध्यापक व छात्र-छात्राओं ने उपस्थित होकर लाभ उठाया। मृदा में बढ़ते प्रदूषण और गुणवत्ता में आने वाली कमी को देखते हुये यह आवश्यक है कि विद्यार्थी इसके प्रति जागरूक हो और कम साधनों में मृदा परीक्षण कर अच्छी फसल और स्वस्थ मृदा हेतु कार्य कर सकें। कार्यषाला के आयोजन के महत्व एवं उसकी उपयोगिता पर रसायन शास्त्र विभाग के डाॅ. व्ही.एस.गीते ने प्रकाष डाला। 
श्री अभिषेक कुमार आडिल ने मिट्टी की उर्वरकता को बढ़ाने के लिये सुझाव दिये। इस कार्यशाला में विद्यार्थियों के साथ प्राध्यापकों की भी सक्रिय भागीदारी रही। रसायन शास्त्र की विभागाध्यक्ष डाॅ. अनुपमा अस्थाना ने बताया कि नीति आयोग एवं राज्य शासन की मंशा अनुसार महाविद्यालय में मृदा परीक्षण हेतु समस्त संसाधनों को उपलब्ध कराने का प्रयास रसायन शास्त्र विभाग द्वारा जारी है। अंचल के कृषकों एवं अन्य शोधकर्ताआंे हेतु मृदा की गुणवत्ता संबंधी वास्तविक एवं सही जानकारी महत्वपूर्ण होती है। मृदा की गुणवत्ता की जानकारी के अभाव में खेतों की फसल एवं पैदावार प्रभावित होती हैं। कार्यशाला के दौरान किए गए प्रयोगों से संबंधित अनेक प्रश्न विद्यार्थियों ने पूछे जिनका विषय-विशेषज्ञों ने समाधान किया, डाॅ. अस्थाना ने बताया कि वर्तमान में रसायन शास्त्र विभाग में मृदा में उपस्थित सोडियम, पोटेशियम, फास्फोरस जैसे रासायनिक तत्वों के परीक्षण की सुविधा उपलब्ध है तथा मृदा के हानिकारक तत्वों के परीक्षण हेतु आधुनिक उपकरण तथा अन्य आवश्यकताओं के पूर्ति के प्रयास महाविद्यालय प्रशाासन द्वारा किए जा रहे हैं। इन सब के उपलब्ध होते ही अंचल के कृषकों एवं शोधकर्ताओं को मृदा परीक्षण की उत्कृष्ट प्रयोगशाला की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। 
इस कार्यशाला के आयोजन में रसायन शास्त्र विभाग के डाॅ. अनुपमा अस्थाना, डाॅ. अलका तिवारी, डाॅ. सुकुमार चटर्जी, डाॅ. अनिल कश्यप, डाॅ. मंजू कौशल, डाॅ. अजय सिंग, डाॅ. नूतन राठौड़, डाॅ. उपमा श्रीवास्तव, डाॅ. अजय पिल्लई, डाॅ. व्ही.एस.गीते, डाॅ. सुनीता मैथ्यू, डाॅ. अनुपमा कश्यप , डाॅ.प्रेरणा कठाने एवं डाॅ. सोमा सेन का महत्वपूर्ण योगदान रहा। 

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