Photo Gallery

Photo Gallery: 16 वीं यंग साइंटिस्ट कांग्रेंस का गरिमामय उद्घाटन विज्ञान एवं टेक्नोलाॅजी का प्रयोग सामाजिक हित में हो

 

16 वीं यंग साइंटिस्ट कांग्रेंस का गरिमामय उद्घाटन विज्ञान एवं टेक्नोलाॅजी का प्रयोग सामाजिक हित में हो


Venue : Govt. V.Y.T. PG Autonomous College, Durg
Date : 27/02/2018
 

Story Details

विज्ञान एवं टेक्नालाॅजी का प्रयोग सामाजिक हित में होना चाहिए। हमारे युवा शोधार्थियों का यह दायित्व है कि वे अपने शोध कार्य के दौरान सामाजिक हितों को सर्वोपरि रखेें। ये उद्गार हैदराबाद स्थित डिफेंस रिसर्च डेव्हलपमेंट आर्गेनाइजेशन के डायरेक्टर श्री अनिल सिंह ने आज बीआईटी दुर्ग के सभागार में व्यक्त किये। श्री सिंह आज छत्तीसगढ़ काउसिंल आॅफ साईंस एण्ड टेक्नालाॅजी रायपुर द्वारा प्रायोजित एवं दुर्ग विश्वविद्यालय दुर्ग द्वारा आयोजित 16 वीं युवा वैज्ञानिक कांग्रेंस के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। श्री सिंह ने कहा कि हम अकेले नही अपितु पूरा ब्रमाण्ड हमारे साथ है। हमारी युवा पीढ़ी में रचनात्मक एवं नई चीजों को सीखने की क्षमता है। आज अपने विशेष आमंत्रित व्याख्यान में डाॅ. सिंह ने इलेक्ट्रानिक वार फेयर पर रोचक व्याख्यान दिया। आउट स्टैण्डिंग साइंटिस्ट श्री अनिल सिंह ने सेना की राडार प्रणाली विद्युत चुम्बकीय विकिरण की महत्ता पर प्रकाश डाला। दुश्मन के राडार से बचकर उनके बारे में सम्पूर्ण जानकारी एकत्र करने की प्रक्रिया पर श्री सिंह ने रोचक जानकारी दी। अंत में श्री सिंह ने 50 साल की इलेक्ट्रानिक्स आधारित हथियारों की विकास यात्रा का वर्णन किया। आमंत्रित व्याख्यान के पूर्व यंग साइंटिस्ट कांग्रेंस के सहायक समन्वयक डाॅ. अनिल कुमार ने मुख्य अतिथि का परिचय दिया। 
इससे पूर्व कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए छत्तीसगढ़ कौंसिल आॅफ साइंस एण्ड टेक्नालाॅजी के महानिदेशक डाॅ. के. सुब्रमण्यम ने युवा वैज्ञानिकों से आव्हन किया कि वे हर चुनौती को स्वीकारें। किसी भी तथ्य को एकाएक स्वीकारने के स्थान पर उस तथ्य का पहले स्वयं विश्लेषण करें। डाॅ. सुब्रमण्यम ने कथ्य, तथ्य तथा सत्य जैसे तीन प्रमुख बिंदुओं का गहराई से विश्लेषण करते हुए युवा शोधकर्ताओं से कहा कि वे स्थानीय मानसिकता से उपर उठकर विश्व स्तर की प्रतिस्पर्धा में शामिल हों। यंग साइंटिस्ट कांग्रेंस के नोडल अधिकारी डाॅ. अजय सिंह ने अपने संबोधन में बताया कि 16 वीं युवा वैज्ञानिक कांग्रेंस में 27 एवं 28 फरवरी को कुल 188 शोधपत्र का मौखिक प्रस्तुतिकरण होगा। 
दुर्ग विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. एन.पी. दीक्षित ने विशिष्ट अतिथि के रूप में अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि साइंस कालेज, दुर्ग एवं बीआईटी दुर्ग के सहयोग से आज यह युवा वैज्ञानिक कांग्रेंस का आयोजन संभव हो पाया। अवलोकन एवं विश्लेषण पर जोर देते हुए डाॅ. दीक्षित ने सदैव उद्देश्य पूर्ण शोधकार्य करने का उपस्थित शोधकर्ताओं से आग्रह किया। जम्मू आईआईटी के निदेशक डाॅ. एम.एस. गौर ने कहा कि युवा शोधार्थी केवल इन्टरनेट अथवा गूगल की जानकारी पर ही आश्रित न रहें, बल्कि स्वयं हर तथ्य का विश्लेषण कर वास्तविकता का पता लगाये। कोई भी आवष्किार जीवन को प्रभावित करता है। बीआईटी दुर्ग के प्राचार्य डाॅ. अरूण अरोरा ने कहा कि किसी भी देश की अमीरी वहां के नागरिकों की बौध्दिक क्षमता होती है। शोधार्थी अपनी रचनात्मक गतिविधि के माध्यम से लक्ष्य को प्राप्त करें। साइंस कालेज, दुर्ग के प्रभारी प्राचार्य डाॅ. एम.ए. सिद्दीकी ने अपने संबोधन में कहा कि युवा शोधार्थियों को ग्रामीण अंचल के हित में शोधकार्य करना चाहिए। 
इससे पूर्व कार्यक्रम की संचालक डाॅ. समृध्दि मिश्रा एवं भाग्यश्री ने युवा वैज्ञानिक कांग्रेंस के आयोजन एवं उसकी महत्ता पर प्रकाश डाला। उद्घाटन समारोह में कुलपति डाॅ. दीक्षित एवं सीकाॅस्ट के महानिदेशक डाॅ. सुब्रमण्यम् ने देश के विभिन्न हिस्सों से आये कुल 55 निर्णायकों को स्मृति चिन्ह एवं पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया। साइंस कालेज, दुर्ग की प्राध्यापक डाॅ. के. पद्मावती द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना के साथ आरंभ हुए उद्घाटन समारोह में अतिथियों का पुष्पगुच्छ से स्वागत करने वाले में डाॅ. अनुपमा अस्थाना, डाॅ. जगजीत कौर सलूजा, डाॅ. प्रशांत श्रीवास्तव, डाॅ. संतोष सार, डाॅ. ए.के. खान, डाॅ. विकास पंचाक्षरी, डाॅ. भूपेन्द्र कुलदीप, डाॅ. अनिल जैन आदि शामिल थे। उद्घाटन समारोह के अंत में दुर्ग विश्वविद्यालय के कुलसचिव डाॅ. एस.के. त्रिपाठी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। 
भोजन अवकाश के पश्चात् यंग साइंटिस्ट कांग्रेंस के प्रथम दिन बीआईटी दुर्ग एवं साइंस कालेज, दुर्ग में कुल 13 विषयों के युवा शोधकर्ताओं ने अपने-अपने शोधकार्य का मौखिक प्रस्तुतिकरण पावर प्वाइंट प्रेजेटेंशन के माध्यम से किया। इन विषयों में पर्यावरण विज्ञान, मेडिकल साइंस, एग्रीकल्चर साइंस, गणित एवं सांख्यिकीय, लाइफ साइंस, होम साइंस एवं बिहेव्यिरल साइंस, केमिकल इंजीनियरिंग, पृथ्वी एवं वातावरणीय विज्ञान, कम्प्यूटर साइंस, इलेक्ट्रानिक सिविल एवं आर्किटेक्चर, इलेक्ट्रिल एवं इलेक्ट्रानिक तथा मैकेनिकल इंजीनियरिंग, बायोटेक्नालाॅजी आदि विषय शामिल थे। कल 28 फरवरी को शेष बचे विषयों बायोलाॅजी, पर्यावरण विज्ञान, मेडिकल साइंस, पशु चिकित्सा विज्ञान, माइनिंग तथा धातु कर्म, कृषि अभियांत्रिकी, भौतिकी एवं रसायन शास्त्रों से संबंधित मौखिक प्रस्तुतिकरण बीआईटी परिसर में आयोजित होगंे। 
आज प्रस्तुत प्रमुख शोधपत्रों मेें भूगर्भशास्त्र की चंचल सिंह ने दुर्ग जिले के उपयोगी क्षेत्रों का सेटेलाइट के माध्यम से अध्ययन कर खेतिहर, व्यर्थ पड़ी जमीन तथा नवनिर्मित होने वाली बिल्डिंग आदि के रूप में भूमि के उपयोग परिवर्तन का विश्लेषण किया। बायोटेक्नालाॅजी में एनआईटी रायपुर की कु. अनुभूति झा ने एंटी फगल, ऐफिकेसी से संबंधित शोधपत्र पढ़ा। पंडित रविशंकर शंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर की शोध छात्रा कु. रिशिमा लाकेश ने जेण्डर तथा स्वधारणा को कैरियर की परिपक्वता संबंधी शोधपत्र पढ़ा, बायोटेक्नालाॅजी में भूमिका यदु ने एंटी आॅक्सिडेंट के परिवर्तन तथा होम साइंस की निशा बंछोर ने उंचाई, वजन तथा बाॅडी माॅस के महिलाओं के शारीरिक परिवर्तन संबंधी शोधपत्र पढ़ा। वहीं शोभना रामटेके ने मच्छर मार अगरबत्ती से निकलने वाले धुएं के स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव संबंधी शोधपत्र पढ़ा, मेडिकल साइंसेंस ने रजनी यादव ने किमो थैरेपी का उपचार प्राप्त कर रहे रोगियों के चिकित्सीय निरीक्षण से संबंधित शोध पत्र प्रस्तुत किया। वहीं एनआईटी, रायपुर की रूबिया खान ने भूमिगत जल प्रदूषण पर केन्द्रित शोधपत्र पढ़ा। आज प्रथम दिन कुल 13 विषयों में 119 शोधार्थियों ने शोध पत्रों का प्रस्तुतिकरण किया। 
प्रतिभागी युवा वैज्ञानिकों एवं देश के विभिन्न हिस्सों से आये निर्णायकों तथा गणमान्य नागरिकों की सम्मान में दुर्ग विश्वविद्यालय द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। साइंस कालेज दुर्ग के दो भूतपूर्व विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। इसमें खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त एवं पद्मश्री बिरजू महाराज की शिष्या डाॅ. सरिता श्रीवास्तव ने रायगढ़ घराने का खूबसूरत कत्थक नृत्य प्रस्तुत किया। शिव वंदना पर आधारित इस कत्थक नृत्य के दौरान डाॅ. सरिता ने चक्कर एवं कत्थक के विभिन्न विधाओं को प्रस्तुत किया। तबले पर संगत खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय के पंडित विवेक तथा गायन पंडित सुरेश दुबे ने किया। कत्थक नृत्य के पश्चात् भिलाई के जाने माने गायक श्री प्रभंजय चतुर्वेदी ने सुगम संगीत संध्या के अंतर्गत सुरीले भजनों एवं गजल की प्रस्तुति दी। तबले पर संगत श्री भालचंद्र शेंगेकर ने की। सांस्कृतिक संध्या का संचालन बीआईटी दुर्ग की मैनेजमेंट विषय की प्राध्यापक डाॅ. समृध्दि मिश्रा एवं भिलाई महिला महाविद्यालय की डाॅ. भाग्यश्री ने किया। 

16 वीं यंग साइंटिस्ट कांग्रेंस का गरिमामय उद्घाटन विज्ञान एवं टेक्नोलाॅजी का प्रयोग सामाजिक हित में हो Photos