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शोध कार्य का उद्देश्य सदैव सामाजिक हित में हो - प्रो. चौधरी


Venue : Govt. V.Y.T. PG Autonomous College, Durg
Date : 10/01/2018
 

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शोध कार्य का उद्देश्य सदैव सामाजिक हित में हो इस बात का प्रत्येक शोधार्थी को ध्यान रखना चाहिए। ये उद्गार बरकत उल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल के समाजशास्त्र के प्राध्यापक डाॅ. एस.एन. चैधरी ने शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग में व्यक्त किये। डाॅ. चैधरी आज महाविद्यालय के समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र एवं इतिहास विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित 3 दिवसीय कार्यशाला के मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। शोध प्राविधि विषय पर आधारित इस कार्यशाला में विभिन्न प्रदेशों के लगभग 100 शोध छात्र-छात्रायें हिस्सा ले रहे है। महाविद्यालय के स्वामी विवेकानंद सभागार में आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन समारोह में बड़ी संख्या में उपस्थित प्राध्यापकों एवं शोधार्थियों को संबोधित करते हुए डाॅ. चैधरी ने कहा कि शोध का चयन तथा पध्दति महत्वपूर्ण होती है। वर्तमान को संवारने में इतिहास की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। वर्तमान समय में इतिहास के कुछ अंशों की पुर्नलेखन की आवश्यकता है। शोध कर्ताओं को सामाजिक समस्याओं के वैज्ञानिक रूप से विश्लेषण का प्रयास करना चाहिए। आज भी हमारे शोध कार्यों में विदेशी प्रणाली का स्पष्ट प्रभाव झलकता है। शोध करने के साथ-साथ प्राप्त होने वाले आंकड़ों का सही ढंग से प्रस्तुतिकरण शोध कार्य का सबसे प्रमुख अंग है। आदिवासी समाज से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर शोध कर वास्तविक स्थिति को समाज के समक्ष उचित ढंग से लाये जाने की आवश्यकता है। 
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. एस.के. राजपूत ने कहा कि नये साल के प्रारंभ में ही महाविद्यालय में देशभर के युवा शोधकर्ताओं की इतनी बड़ी संख्या में उपस्थिति महाविद्यालय के शोधकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार करेगी। इसी उद्देश्य से यह कार्यशाला आयोजित की गयी है। युवा शोधार्थियों को समाज से जुड़े ज्वलंत मुद्दो जैसे थर्ड जेंडर, लिव इन रिलेशनशिप तथा मानव तस्करी जैसे बिंदुओं पर भी शोध कार्य करके इन विकृतियों को समाज से हटाने का प्रयास करना चाहिए। कार्यशाला के आरंभ में इतिहास विभाग की प्राध्यापक डाॅ. ज्योति धारकर ने कार्यशाला की विषय वस्तु पर विस्तृत प्रकाश डाला। अपने स्वागत भाषण में कार्यशाला की संयोजक एवं समाजशास्त्र की प्राध्यापिका डाॅ. अश्विनी महाजन ने कहा कि शोध कार्य में शोध प्राविधि का महत्वपूर्ण स्थान होता है। हर तथ्य का गहराई से विश्लेषण न केवल अकादमिक बल्कि सामाजिक एवं राष्ट्रीय जिम्मेदारी है। कार्यशाला के प्रथम दिन तकनीकी सत्र के समापन अवसर पर धन्यवाद ज्ञापित करते हुए अर्थशास्त्र विभाग की प्राध्यापक डाॅ. के. पद्मावती ने बताया कि इस त्रिदिवसीय कार्यशाला में द्वितीय दिवस पर पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के प्राध्यापक डाॅ. रवीन्द्र ब्रम्हे तथा अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा के डाॅ. महेश शुक्ला एवं साईंस कालेज, दुर्ग के डाॅ. अनिल पाण्डेय का व्याख्यान होगा। 
संजल राजपूत एवं राहुल द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना के साथ आरंभ हुए उद्घाटन सत्र में अतिथियों का पुष्पाहार से स्वागत करने वालों में डाॅ. अश्विनी महाजन, डाॅ. के.पद्मावती तथा डाॅ. कल्पना अग्रवाल शामिल थी। प्रमुख रूप से उपस्थित लोगों में डाॅ. कृष्णा चटर्जी, डाॅ. एम. ए सिद्दीकी, डाॅ. आई.एस. चन्द्राकर, डाॅ. प्रशांत श्रीवास्तव, डाॅ. राकेश तिवारी, डाॅ. देव प्रकाश दुबे, डाॅ. अंशुमाला चन्दनगर, डाॅ. सपना शर्मा, डाॅ. मर्सी जाॅर्ज, डाॅ. सुषमा यादव, डाॅ. मौसमी डे, डाॅ. रजनीश उमरे, डाॅ. अमरनाथ शर्मा आदि शामिल थे।

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