Photo Gallery

Photo Gallery: साइंस कालेज, दुर्ग में शोध प्राविधि पर कार्यशाला का दूसरा दिन शोध विषय का चयन एवं पध्दति शास्त्र प्रत्येक शोधकर्ता हेतु महत्वपूर्ण

 

साइंस कालेज, दुर्ग में शोध प्राविधि पर कार्यशाला का दूसरा दिन शोध विषय का चयन एवं पध्दति शास्त्र प्रत्येक शोधकर्ता हेतु महत्वपूर्ण


Venue : Govt. V.Y.T. PG Autonomous College, Durg
Date : 11/01/2018
 

Story Details

शोध विषय का चयन एवं पध्दति शास्त्र प्रत्येक शोधकर्ता हेतु महत्वपूर्ण होता है। शोधकर्ताओं को शोध विषय के चयन के पूर्व साहित्य अध्ययन के माध्यम से विषय से संबंधित सम्पूर्ण जानकारी एकत्रित करनी चाहिए। इसके पश्चात् ही शोध की दशा एवं दिशा तय होती है। ये उद्गार शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग में शोध पध्दति शास्त्र विषय पर चल रही तीन दिवसीय कार्यशाला के दूसरे दिन आमंत्रित वक्ताओं ने व्यक्त किये। महाविद्यालय के स्वामी विवेकानंद आॅडियो विजुअल हाॅल में आज तीन आमंत्रित व्याख्यान आयोजित हुए। प्रथम तकनीकी सत्र में सेंट थाॅमस महाविद्यालय भिलाई की मनोविज्ञान विभाग की सहायक प्राध्यापक, डाॅ. देवजानी मुखर्जी ने शोध पध्दति शास्त्र के विभिन्न बिंदुओं का गहराई से विश्लेषण करते हुए शोध विषय के चयन, उससे संबंधित आंकड़ों का संग्रहण, सर्वेक्षण की कार्यप्रणाली तथा प्राप्त होने वालों आंकड़ों का सांख्यिकीय विश्लेषण एवं प्रस्तुतिकरण पर रोचक व्याख्यान दिया। डाॅ. मुखर्जी ने बताया कि चरणबध्द शोध कार्य से जहां एक ओर शोधार्थी को अकादमिक सफलता प्राप्त होती है। वहीं दूसरी ओर सामाजिक हितों की रक्षा तथा समाज से जुड़े ज्वलंत मुद्दो को सुलझाने में शोधार्थी अपने महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है। डाॅ. मुखर्जी ने शोध प्रश्नावली के संबंध में विस्तृत व्याख्यान दिया। 
द्वितीय तकनीकी सत्र में पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के अर्थशास्त्र के प्राध्यापक डाॅ. रवीन्द्र ब्रम्हे ने अपने व्याख्यान में तथ्य संकलन, विश्लेषण एवं व्याख्या पर सारगर्भित व्याख्यान दिया। डाॅ. ब्रम्हे ने बताया कि अधिकांश शोधार्थी अपने शोधकार्य के दौरान चुने गये विषय की महत्ता एवं गंभीरता से अनभिज्ञ होते है। शोधार्थी का पहला कर्तव्य है कि चयनित विषय का ज्ञान एवं उससे संबंधित तथ्यों का संकलन करना। इसके पश्चात् शोधार्थी को अपने स्वयं की अकादमिक, आर्थिक, पारिवारिक एवं सामाजिक सीमाओं को ध्यान में रखते हुए विषय का चयन करना चाहिए। जरूरत से ज्यादा बड़े विषय को लेकर कई शोधार्थी शोध काल के संपूर्ण समय में कठिनाई का सामना करते है। डाॅ. ब्रम्हे ने बताया कि सामाजिक विज्ञान के विषयों में प्राप्त आंकड़ों का सांख्यिकीय विश्लेषण एसपीएसएस साॅप्टवेयर के माध्यम से सफलता पूर्वक किया जा सकता है। अतः प्रत्येक शोधार्थी को कम्प्यूटर एवं सांख्यिकीय का ज्ञान आवश्यक है। आंकड़ों के विश्लेषण के पश्चात् उनकी व्याख्या करने हेतु शोधार्थी को संबंधित विषय का ठोस ज्ञान तथा भाषा पर अच्छी पकड़ होना आवश्यक है। वर्तमान समय में मौलिक शोधकार्यों एवं उनकी मौलिक भाषा होने पर ही थिसीस अनुमोदित हो पाती है। अन्यथा अनेक शोधार्थियों की कड़ी मेहनत के बावजूद थीसिस उच्च गुणवत्ता के अभाव में अस्वीकृत हो जाती है। 
तृतीय तकनीकी सत्र में अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा के प्राध्यापक डाॅ. महेश शुक्ला ने शोध प्रतिवेदन तथा थीसिस का प्रारूप विषय पर महत्वपूर्ण जानकारी उपस्थित प्रतिभागियों को दी। डाॅ. शुक्ला ने बताया कि प्रत्येेक विश्वविद्यालय में शोध प्रतिवेदन प्रस्तुत करने हेतु एक निर्धारित प्रारूप होता है। उस प्रारूप के अनुसार ही शोधार्थी को अपना शोध प्रतिवेदन प्रस्तुत करना चाहिए। यूजीसी के नये नियमों के मुताबिक प्रत्येक शोधार्थी को छः माह का कोर्सवर्क पूर्ण करना आवश्यक है। कोर्सवर्क पूर्ण करने के पश्चात् ही कोई भी शोधार्थी रिसर्च डिग्री कमेटी के समक्ष अपना शोधकार्य का विषय अनुमोदित कराने हेतु पात्र माना जाता है। थीसिस के प्रारूप पर विस्तृत जानकारी प्रदान करते हुए डाॅ. महेश शुक्ला ने बताया कि वर्तमान समय में थीसिस के साथ मौलिकता का प्रमाण पत्र, शोध निर्देशक के साथ 200 दिवसों की भौतिक रूप से उपस्थिति आदि का प्रमाण पत्र संलग्न करना आवश्यक है, साथ ही यूजीसी के नियमानुसार थीसिस जमा करते समय शोधार्थी का यूजीसी द्वारा मान्यता प्राप्त शोध जर्नल में प्रकाशित शोध पत्र की प्रति संलग्न करना आवश्यक है। इसके साथ-साथ प्रत्येक शोधार्थी को राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला/सेमीनार में शोध पेपर प्रस्तुतिकरण का प्रमाण पत्र भी संलग्न करना आवश्यक है। इन सभी प्रपत्रों के अभाव में थीसिस जमा करने में कठिनाई होती है। 
इससे पूर्व तकनीकी सत्र के आरंभ में कार्यशाला की संयोजक डाॅ. अश्विनी महाजन एवं आयोजन सचिव डाॅ. के. पद्मावती ने तकनीकी सत्रों के विभिन्न विषयों पर प्रकाश डाला तथा आमंत्रित वक्ताओं का परिचय उपस्थित प्रतिभागियों से कराया। अर्थशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. शिखा अग्रवाल एवं समाज शास्त्र की विभागाध्यक्ष डाॅ. अश्विनी महाजन तथा आमंत्रित वक्ताओं डाॅ. देवजानी मुखर्जी, डाॅ. रवीन्द्र ब्रम्हे एवं डाॅ. महेश शुक्ला का पुष्पगुच्छ से स्वागत करने वालों में डाॅ. ज्योति धारकर, डाॅ. कृष्णा चटर्जी, डाॅ. अंशुमाला चन्दनगर शामिल थी। तकनीकी सत्रों की समाप्ति के पश्चात् धन्यवाद ज्ञापन डाॅ. अंशुमाला चन्दनगर ने किया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से उपस्थित लोगों में डाॅ. ओ.पी. गुप्ता, डाॅ. प्रशांत श्रीवास्तव, डाॅ. राकेश तिवारी, डाॅ. कल्पना अग्रवाल, डाॅ. सपना शर्मा, डाॅ. मर्सी जाॅर्ज, डाॅ. सुषमा यादव, डाॅ. दिलीप साहू, डाॅ. गाविंद गुप्ता, डाॅ. रजनीश उमरे, सविता डहरिया आदि शामिल थे।

साइंस कालेज, दुर्ग में शोध प्राविधि पर कार्यशाला का दूसरा दिन शोध विषय का चयन एवं पध्दति शास्त्र प्रत्येक शोधकर्ता हेतु महत्वपूर्ण Photos