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Photo Gallery: इतिहास पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार उद्घाटित सामाजिक आन्दोलनों का राष्ट्र निर्माण में विशेष महत्व

 

इतिहास पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार उद्घाटित सामाजिक आन्दोलनों का राष्ट्र निर्माण में विशेष महत्व


Venue : Govt. V.Y.T. PG AUTONOMOUS COLLEGE, DURG
Date : 28/02/2020
 

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सामाजिक आन्दोलनों का राष्ट्र निर्माण में विशेष महत्व होता है सामाजिक सुधार हमेशा चलने वाली प्रक्रिया है । ये उद्गाार आज देश के जाने माने इतिहास कारो ने आज शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग (छ.ग.) में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीयसेमीनार के उद्घाटन सत्र में व्यक्त किये । आधुनिक भारत में सामाजिक सुधार आन्दोलन विषय पर 28 एवं 29 फरवरी 2020  को आयोजित होने वाली इस राष्ट्रीय सेमीनार में देश के आठ प्रान्तों के लगभग 100 से अधिक इतिहास कार, शोधकर्ता, प्राध्यापक एवं छात्र-छात्राऐं हिस्सा ले रहे है ।
    माता सरस्व्ती के पूजन एवं छत्तीसगढ़ के राज्य गीत अरपा पैरी के धार की प्रस्तुति के बाद कार्यक्रम की संचालन डाॅ. ज्योति धारकर ने सेमीनार की विषय वस्तु एवं उसकी आवश्यकता पर विचार रखे । सेमीनार के संयोजक डाॅ. अनिल पाण्डेय ने बताया  िकइस सेमीनार में छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, उत्तरप्रदेश आदि राज्यों से प्रसिद्ध इतिहासकार अपने आमंत्रित व्याख्यान के साथ-साथ शोध पत्रों का वाचन करेगें । अपने स्वागत भाषण में महाविद्यालय क ेप्राचार्य डाॅ. आर. एन. सिंह ने कहा कि राजाराम मोहन राय से लेकर वर्तमान तक सामाजिक सुधार हेतु आन्दोलन होते रहे है । सही उद्देश्य वाले आन्दोलनों से समाज को लाभ होता है । डाॅ. सिंह ने इतिहास विभाग के आयोजन की सराहना करते हुये अन्य विभागों के लिए भी इसे अनुकरणीय बताया ।
    कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दुर्ग नगर निगम के महापौर धीरज बाकलीवाल ने कहा कि छ.ग. इतिहास परिषद का यह आयोजन अत्यंत सराहनीय है । युवा वर्ग को सामाजिक कृतियों के विरूद्ध आन्दोलन करना चाहिए । श्री बाकलीवाल ने शिवनाथ्द नही को बचाने हेतु रचनात्मक आन्दोलन की वकालत की । उन्होंने कहा कि आज इस सेमीनार में तीन पीढियों का संगम दिखाई दे रहा है । समाज में रचनात्मक सुधार लाने की हम सभी की जिम्मेदारी है । श्री बाकलीवाल ने विवेकानंद जी के श्लोगन के साथ अपना भाषण समाप्त किया ।
    प्रसिद्ध इतिहासकार नई दिल्ली के प्रो. पी. के. शुक्ला ने उपस्थित प्रतिभागियों से आग्रह किया की वे पूरे समय सेमीनार में उपस्थित रहकर अपने विचारों का मंथन करे साथ ही वरिष्ठ साहित्कारों से प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासा का समाधान करें । 83 वर्षीय इतिहास के पितामह कहे जाने वाले डाॅ. सुरेश मिश्रा ने अपने संबोधन में शोध छात्रों से आव्हान किया की वे अपने आस-पास होने वाले सामाजिक परिवर्तनों की तरफ ध्यान दे । हमे पिछले 50 वर्षो में घटित सामाजिक आन्दोलनों को भी महत्व देना चाहिए । उन्होंने बताया कि स्टेनफोड विश्वविद्यालय अमेरिका की शोधकर्ता कबीर के भजनों पर बहुत अच्छा शोध कार्य कर रही है । तो हम भारतीय इस प्रकार के उल्लेखनिय शोध कार्य क्यों नहीं करते । छ.ग. इतिहास परिषद की अध्यक्ष र. वि. रायपुर की प्राध्यापक डाॅ. आभापाल ने अपने संबोधन में छत्तीसगढ़ इतिहास परिषद के गठन की आवश्यकता एवं उसके द्वारा किये जा रहे कार्यो की रूप  रेखा प्रस्तुत की । शिवनाथ बचाव आन्दोलन प्रमुख श्री संजय मिश्रा ने कहा कि इतिहास के पन्नों में सुधार की आवश्यकता है । हमारे छ.ग. राज्य के राज्य गीत अरपा पैरी के धार में भी जल संरक्षण का स्पष्ट संदेश है । श्री मिश्रा के अनुसार आन्दोलन हमेशा रचनात्मक होना चाहिए ।
    उद्घाटन सत्र के बाद अपने आमंत्रित व्याख्यान में नई दिल्ली की प्रसिद्ध इतिहास कार डाॅ. चारू गुप्ता ने सामाजिक आन्दोलनों की महत्ता एवं उसके चरणबद्ध रूपरेखा प्रभावशाली ढंग से व्यक्त की डाॅ. गुप्ता ने बताया कह स्थान एवं परिस्थिति के अनुसार आन्दोलन का स्वरूप  बदलता है । उन्होने झबुआ जिले की स्वयंसेवी संस्था द्वारा भीलों की प्रथाओं पर किये शोध कार्य की जानकारी दी । डाॅ. चारू गुप्ता का व्याख्यान अत्यंत प्रभावशाली रहा । इसके अतिरिक्त आज सेमीनार के द्वितीय एवं तृतीय सत्र में लगभग 20 से अधिक शोधकर्ताओं ने अपने शोध पत्र का वाचन किया । आज सेमीनार के दौरान साइंस काॅलेज दुर्ग के समस्त प्राध्यापकों के अलावा प्रसिद्ध इतिहासकार डाॅ. एम. ए. खान, डाॅ. रमेन्द्र नाथ मिश्रा, डाॅ. के. के. अग्रवाल, डाॅ. शम्पा चैबे, डाॅ. नागेन्द्र, डाॅ. जी. सी.पाण्डेय, डाॅ. ब्रज मिश्रा, डाॅ. आशीष कुमेटी, छात्र नेता आदित्य नारंग तथा छात्रसंघ अध्यक्ष साफिया परवीन सहित छ.ग. अंचल के अनेक इतिहासकार उपस्थित थे ।

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