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Photo Gallery: संदीप्ति एवं उसकी उपयोगिता पर आमंत्रित व्याख्यान - वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहन देने से ही देष की तरक्की संभव

 

संदीप्ति एवं उसकी उपयोगिता पर आमंत्रित व्याख्यान - वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहन देने से ही देष की तरक्की संभव


Venue : Govt. V.Y.T. PG AUTONOMOUS COLLEGE, DURG
Date : 16/01/2020
 

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आज शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग में आई क्यू ए सी तथा  भौतिकषास्त्र विभाग द्वारा आमंत्रित व्याख्यान का आयोजन किया गया, जिसमें बी. आई. टी. रायपुर से आये हुए डाॅ. विकास दुबे ने विषेषज्ञ के तौर पर व्याख्यान दिया। कार्यक्रम का सचांलन करते हुए एम. एस. सी. तृतीय सेमेस्टर भौतिक शास्त्र की प्रतिक्षा तिवारी ने डाॅ. विकास दुबे का संक्षिप्त परिचय दिया। डाॅ. विकास दुबे ने विद्यार्थियों को लूमिनिसेन्स आधारभूत तथा इसकी उपयोगिता के बारे में विस्तार पूर्वक बताया। लूमिनिसेन्स (संदीप्ति) किसी पदार्थ द्वारा प्रकाष का सहज उत्सर्जन होता है जो गर्मी से उत्पन्न नही होता है। उन्होने लूमिनिसेन्स के प्रकार तथा इसकी चारों पीढ़ियों के बारे में बताया, प्रथम पीढी में लालटेन तथा केरोसीन से जलने वाले ढ़िबरीयों, द्वितीय पीढी में विद्युत बल्व, तृतीय पीढी में सी. एफ. एल तथा चतुर्थ पीढी में एल ई डी/ओ एल ई डी के बारे में बताया तथा साथ में यह कहा की हर पीढी के साथ प्रदूषण कम होता गया। उन्होने लूमिनिसेन्स पर हुए कुछ नवीनतम् शोध को तथा एल ई डी की लागत कैसे कम की जा सकती है इस बारे में विद्यार्थियों से चर्चा की। 
डाॅ. विकास दुबे ने विद्यार्थियों को शोध से जुड़ने के लिए प्रेरित किया ताकि भविष्य में हम में से कोई एस.एन. बोस सर सी. वी. रमन, ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, होमी जहांगीर भाभा, जे.सी. बोस बन सके। इसको उन्होने क्रिकेट से जोड़कर पूछा कि जिस प्रकार सचिन तेन्दुलकर की जगह विराट कोहली ने ले ली उसी प्रकार अभी तक कोई इन भारतीय वैज्ञानिको की जगह क्यों नही ले पाया? उन्होंने बताया आज की पीढी का झुकाव केवल भविष्य की ओर है तथा वर्तमान में कोई विद्यार्थी विज्ञान की प्रगति के बारे में नही सोच रहा है। उन्होने विद्यार्थियो को शोध के लिए चाइना तथा जापान का उदाहरण देते हुए कहा कि वहा हर विद्यार्थी की सोच नई टेक्नोलाॅजी या नये अविष्कार की ओर होती है। इसके साथ ही उन्होने विदेष में शोध करने की संभावनाओं के बारे में बताया कि किस प्रकार हम दक्षिण कोरिया, दक्षिण आफ्रिका में अपना शोध कार्य कर सकते है। हमारी सोच तथ्यात्मक होनी चाहिए, जिसे वैज्ञानिक विवेक अनुप्रमाणित कर सके। भारत सरकार द्वारा विभिन्न प्रकार की योजनाओं के तहत विदेष में शोध की संभावनाएं आपार हैं। एम.एस.सी प्रथम एवं तृतीय सेमेस्टर भौतिक शास्त्र के विद्यार्थियों ने प्रष्नों को पूछकर अपनी जिज्ञासाआंे का समाधान किया। 
आई क्यु ए. सी. संयोजक डाॅ. जगजीत कौर सलूजा ने बताया इस व्याख्यान का मुख्य उद्देष्य विद्यार्थियों को शोध करने की उपयोगिता तथा नयी तकनीक को जानने के लिए आयोजित किया गया, जिससे कुछ विद्यार्थी भविष्य में शोध की ओर अपने कदम बढायें, वर्तमान समय में जो विद्यार्थी नये अन्वेषण करेगें वे ही उन्नति के पथ पर अग्रसर होगे। विज्ञान समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है तथा वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहन देने से ही देष की तरक्की संभव हैै। 
प्राचार्य डाॅ. आर.एन. सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में भारत सरकार द्वारा नूतन अन्वेषण को बहुत प्रोत्साहन दिया जा रहा है इस वातावरण का विद्यार्थियों को लाभ उठाना चाहिए, इस आमंत्रित व्याख्यान की सफलता के लिए बधाई देते हुए भौतिक शास्त्र विभाग के इस प्रयत्न की भरपूर प्रषंसा करते हुए कहा कि इस व्याख्यान के द्वारा विद्यार्थियों ने लूमिनिसेन्स इसकी उपयोगिता के बारे महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। 
धन्यवाद ज्ञापन एम.एस.सी प्रथम सेमेस्टर से अदिति सिंह द्वारा किया गया। कार्यक्रम के दौरान डाॅ अनिता शुक्ला, डाॅ आर एस सिंह, सीतेष्वरी चन्द्राकर, डाॅ अभिषेक मिश्रा, डाॅ नेहा तिवारी, नीरज वर्मा, तीरथ सिन्हा, डाॅ. मनीष मिश्रा, डाॅ. श्रीकान्त मिश्रा के साथ बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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