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Photo Gallery: इंस्पायर प्रोग्राम का दूसरा दिन - भारतीय प्राचीन अवधारणायें ही वर्तमान विदेषी वैज्ञानिक शोध कार्यों का आधार - डाॅ. धर्मेन्द्र सिंह

 

इंस्पायर प्रोग्राम का दूसरा दिन - भारतीय प्राचीन अवधारणायें ही वर्तमान विदेषी वैज्ञानिक शोध कार्यों का आधार - डाॅ. धर्मेन्द्र सिंह


Venue : Govt. V.Y.T. PG AUTONOMOUS COLLEGE, DURG
Date : 04/01/2020
 

Story Details

भारतीय प्राचीन अवधारणायें ही वर्तमान विदेषी वैज्ञानिक शोध कार्यों का आधार है। भारतवर्ष में प्राचीन ग्रंथों जैसे महाभारत, रामायण आदि में उल्लेखित पुष्पक विमान तथा संजय द्वारा धृतराष्ट्र को महाभारत का सम्पूर्ण चित्रण वर्तमान समय की वायुयान एवं टेलीविजन के आविष्कार के मूल आधार है। हम भारतीयों ने अपनी भारतवर्ष की प्राचीन अवधारणाओं को महत्व न देकर सदैव विदेषी शोध एवं उनके प्रयोगों को महत्व दिया है। हमें इस भावना से उपर उठकर प्राचीन भारतीय सिध्दांतों का नवीनीकरण वर्तमान समय की मांग के अनुसार करने का प्रयास करना चाहिए। किसी भी अन्य विदेषी ग्रंथों में सूर्य से पृथ्वी की दूरी, काल की गणना तथा चरक संहिता जैसे औषधीय विष्लेषण का उल्लेख नही मिलता। ये उद्गार आईआईटी रूढ़की के डाॅ. धर्मेन्द्र सिंह ने आज शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय दुर्ग में 3-7 जनवरी तक आयोजित 5 दिवसीय डीएसटी इंस्पायर साईंस इंटर्नषिप कैम्प के दूसरे दिन व्यक्त किये। डाॅ. धर्मेन्द्र सिंह ने माइक्रोवेब विकिरण की तीव्रता द्वारा हमारे शरीर पर कम से कम नुकसान होने तथा विकिरण की तीव्रता से बचाव के उपाय से संबंधित विस्तृत जानकारी विद्यार्थियों को दी। उन्होंने बताया कि मोबाईल से बात करते समय हमें अपने कानों से लगभग 4 से 5 सेंटीमीटर मोबाईल दूर रखना चाहिए साथ ही नेटवर्क अथवा बैटरी कमजोर होने के दौरान हमेें बातचीत करने से बचना चाहिए क्योंकि इस समय मोबाईल से सर्वाधिक विकिरण उत्सर्जित होता है।

 आज शालेय प्रतिभागी विद्यार्थियों हेतु राष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिकों के व्याख्यान के साथ-साथ उन्हें साईंस कालेज, दुर्ग की उन्नत प्रयोगषालाओं में प्रायोगिक कार्य कराया गया। प्रायोगिक कार्य के दौरान उपलब्ध नवीनतम उपकरण तथा प्रयोग की विधि को विद्यार्थियों ने स्वयं चलाकर देखा। छत्तीसगढ़ के दूरस्थ अंचलों जैसे बस्तर, सरगुजा, जांजगीर चांपा, बेमेतरा आदि क्षेत्रों से आये विद्यार्थियों के लिए उन्नत प्रयोगषालाओं में स्वयं प्रायोगिक कार्य करना कौतुहल का विषय रहा। अनेक प्रतिभागी विद्यार्थियों ने बताया कि जिन उपकरणों अथवा प्रयोगों को वे केवल पुस्तकों में चित्रों के माध्यम से देखा करते थे। आज स्वयं उन प्रयोगों को करने की अनोखी अनुभूति रही। आज प्रायोगिक कार्याे के दौरान विद्यार्थियों को कम्प्यूटर साॅप्टवेयर, औषधीय पौधों की जानकारी एवं उनका डिसेक्षन कर पहचान करना, बायोटेक्नालाॅजी से संबंधित पीसीआर अभिक्रिया तथा डीएनए की जानकारी, सिकल सेल एनीमिया से संबंधित सारगर्भित जानकारी, छत्तीसगढ़ के खनिज चट्टानों, जीवाष्मों का अध्ययन, रसायन शास्त्र एवं भौतिक शास्त्र के पाठ्यक्रम में शामिल विभिन्न प्रयोग, प्राणीषास्त्र में जीव जंतुओं के डिसेक्षन से संबंधित क्ले माॅडल का अध्ययन कराया गया। विद्यार्थियों ने प्रायोगिक कार्यों को उनके पाठ्यक्रम हेतु अत्यंत लाभप्रद बताते हुए आयोजकों से अगामी 3 दिनों में और अधिक प्रायोगिक कार्यों को आयोजित करने का आग्रह किया। 
महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. आर.एन सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि विद्यार्थियों के लाभ हेतु इंस्पायर कैम्प के शेष दिनों में और अधिक प्रायोगिक कार्य करायें जायेंगे। इसी श्रृंखला में कल 5 जनवरी को विज्ञान के विभिन्न विषयों के प्रयोगों को भौतिक रूप से दिखाने हेतु विद्यार्थियों को रायपुर स्थित साईंस सेंटर का भ्रमण कराया जायेगा। इससे पूर्व प्रथम सत्र में आयोजित व्याख्यान में मुंबई से पधारी डाॅ. संजीवनी घारगे ने ग्राफ थ्योरी के महत्व एवं उसके विज्ञान में अनुप्रयोग पर रोचक व्याख्यान दिया। उन्होंने हकल सिध्दांत के व्याख्या करते हुए नाॅन आइसो मैट्रिक सममितीय डिजाईन को विस्तार से समझाया। डाॅ. घारगे ने मोबाईल तथा एटीएम कार्ड में उपयोग होने वाली कोडिंग व्यवस्था से संबंधित जानकारी भी प्रतिभागी विद्यार्थियों को दी। उन्होंने गणितीय आलंपियाड के जटिल प्रष्नों तथा सूडुकू पहेली हल करने के तरीके भी बताये। डाॅ. घारगे का व्याख्यान विद्यार्थियों के मध्य चर्चा का विषय रहा। 
आज आयोजित एक अन्य व्याख्यान चंडीगढ़ के डाॅ. आलोक श्रीवास्तव ने जीएम काउंटर के प्रायोगिक विष्लेषण करते हुए उसका वास्तविक प्रयोग कर विद्यार्थियों को समझाया। डाॅ. श्रीवास्तव ने भौतिक शास्त्र में प्रायोगिक कार्य के महत्व पर विस्तार से प्रकाष डालते हुए बताया कि कोई भी प्रायोगिक कार्य करने के पूर्व विद्यार्थी को उसका मूल सिध्दांत मालूम होना आवष्यक है। जब तक हमें किसी भी विषय की सैध्दांतिक जानकारी पूर्ण रूप से नही होगी हम प्रायोगिक कार्य को सफल रूप से संपादित नही कर सकते। इंस्पायर कैम्प के लगभग 200 प्रतिभागियों ने अपने अध्ययन काल में पहली बार जी.एम. काउंटर से संबंधित प्रयोग को भौतिक रूप से देखा। डाॅ. श्रीवास्तव के व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों ने अनेक प्रष्न पूछकर अपनी जिज्ञासा का समाधान किया। 
वर्धमान से पधारे डाॅ. अनुपम बसु ने अनुवांषिकीय रोगों से संबंधित रोचक व्याख्यान दिया। डाॅ. बसु ने बताया कि अनुवांषिकीय रोगों से बचने अथवा उसकी तीव्रता को कम करने हेतु हम सभी को सावधानी रखना आवष्यक है। दमा, वात, शुगर जैसी बिमारियां अनुवांषिकीय होती है तथा अनेक बार ऐसा देखा गया है, कि अगली पीढ़ी के सबसे बड़े अथवा सबसे छोटे पुत्र या पुत्री को अनुवांषिकीय रोग हो जाते है। उन्होंने थैलेसिमिया, सिकल सेल एनीमिया, हीमोफिलिया, वर्णाधंता आदि से संबंधित सारगर्भित जानकारी भी दी। 
शारदा विष्वविद्यालय ग्रेटर नोएडा से पधारे डाॅ. एन.बी. सिंह ने नैनो मटेरियल तथा उनके अनुप्रयोगों से संबंधित महत्वपूर्ण व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि नैनो मटेरियल के रूप में परिवर्तित होने पर किसी भी पदार्थ के गुण परिवर्तित हो जाते है जैसे सोने का पीला रंग नैनो स्वरूप में परिवर्तित होने पर रंगहीन हो जाता है। नैनो साईंस के द्वारा आज चिकित्सा एवं इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अनेक बिमारियों का निराकरण तथा संरचनाओं के निर्माण में सफलता प्राप्त हुई है। हमारे सिर के बाल की मोटाई के बराबर साईज के नैनो मटेरियल तैयार किए जा सकते है। 
सायंकालीन सत्र में आयोजित रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रसिध्द कत्थक नृत्यांगना डाॅ. सरिता श्रीवास्तव ने भगवान शंकर की स्तुति तथा ठुमरी पर आधारित कत्थक नृत्य प्रस्तुत किया। साईंस कालेज, दुर्ग के विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ी नृत्य तथा रास गरबा की मोेहक प्रस्तुति दी। शालेय प्रतिभागियों की तरफ से दंतेवाड़ा से आए प्रतिभागियों ने मनमोहक बस्तरिया नृत्य प्रस्तुत कर दर्षकों की तालियां बटोरी। कार्यक्रम के सहायक समन्वयक डाॅ. अनिल कुमार, डाॅ. अजय सिंह एवं डाॅ. प्रषांत श्रीवास्तव ने संयुक्त रूप से जानकारी दी कि कल इंस्पायर कैम्प के तीसरे दिन अहमदाबाद के डाॅ. मानसिंह, मुंबई विष्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डाॅ. संजय देषमुख तथा अहमदाबाद के गणितज्ञ डाॅ. उदयन प्रजापति का आमंत्रित व्याख्यान होगा।

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