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Photo Gallery: साईंस कालेज, दुर्ग में प्रसिध्द वैज्ञानिक गौहर रजा का आमंत्रित व्याख्यान उत्कृष्ट साहित्य के बिना वैज्ञानिक दृष्टिकोण संभव नही - गौहर रजा

 

साईंस कालेज, दुर्ग में प्रसिध्द वैज्ञानिक गौहर रजा का आमंत्रित व्याख्यान उत्कृष्ट साहित्य के बिना वैज्ञानिक दृष्टिकोण संभव नही - गौहर रजा


Venue : Govt. V.Y.T. PG AUTONOMOUS COLLEGE, DURG
Date : 07-10-2019
 

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साईंस कालेज, दुर्ग में प्रसिध्द वैज्ञानिक गौहर रजा का आमंत्रित व्याख्यान 
उत्कृष्ट साहित्य के बिना वैज्ञानिक दृष्टिकोण संभव नही - गौहर रजा

उत्कृष्ट साहित्य के बिना वैज्ञानिक दृष्टिकोण संभव नही है। देष में जितने भी प्रसिध्द साहित्यकार हुये है, उनकी रचनाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण की झलक देखने को मिलती है। आज के युग में नयी पीढ़ी को पुरानी पीढ़ी से बेहतर होने का प्रयास करना चाहिए। ये उद्गार अंतर्राष्ट्रीय स्तर के प्रसिध्द वैज्ञानिक, फिल्मकार, कवि एवं शायर गौहर रजा ने आज शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग के रवीन्द्रनाथ टैगोर सभागार में व्यक्त किये। गौहर रजा साहब आज वैज्ञानिक सेाचना एवं साहित्य विषय पर महाविद्यालय के हिन्दी विभाग तथा आईक्यूएसी सेल के तत्वावधान में प्रभाकर चैबे फाउण्डेषन रायपुर के सहयोग से आयोजित आमंत्रित व्याख्यान दे रहे थे। नेषनल इंस्टीट्यूट आॅफ साईंस एण्ड डेव्हलपमेंट स्टडीज नई दिल्ली के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक एवं राज्य सभा टीवी के विज्ञान कार्यक्रमों के प्रचारक गौहर रजा ने बड़ी संख्या में उपस्थित प्राध्यापकों, शहर के गणमान्य नागरिकों, साहित्यकारों एवं छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को किसी न किसी विषय पर चिंतन करना आवष्यक है। हम अपनी कमजोरी को छुपाने के लिए किसी भी कारण को भगवान की इच्छा कहकर उसकी सत्यता तक नही पहुंचना चाहते। हमारी युवा पीढ़ी का यह दायित्व है कि समाज में व्याप्त कुरीतियों एवं अंधविष्वास के प्रति संघर्ष कर समाज में जागरूकता फैलाना चाहिए। साईंस में चमत्कार का कोई स्थान नही होता। डाॅ. रजा के व्याख्यान के पश्चात् सभागार मेें उपस्थित अनेक श्रोताओं ने प्रष्न पूछकर अपनी जिज्ञासा का समाधान किया। प्रष्न पूछने वालों में लायब्रेरी साईंस के चन्द्रहास साहू, राजनीति शास्त्र के प्राध्यापक डाॅ. शकील हुसैन एवं प्रसिध्द साहित्यकार श्री शरद कोकास शामिल थे। 
इससे पूर्व कार्यक्रम के आरंभ में श्री गौहर रजा का स्वागत प्राचार्य डाॅ. आर.एन. सिंह, डाॅ. अभिनेष सुराना, डाॅ. प्रषांत श्रीवास्तव ने किया। कार्यक्रम के संचालक डाॅ. जय प्रकाष साव ने अपने उद्बोधन में कहा कि तथ्यों को क्रमबध्द एवं तार्किक तरीके से सीखना ही वैज्ञानिक चेतना है। समाज की मिथक को तोड़ना अत्यंत आवष्यक है। किसी भी घटना के बारे में विचार-विमर्ष आवष्यक है। डाॅ. जय प्रकाष साव ने कहा कि हमें नेहरू के तार्किक समाज एवं अज्ञेय के आलोचक समाज को समझना होगा। आज की नई पीढ़ी में विष्लेषण क्षमता का अभाव है। 
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य डाॅ. आर.एन. सिंह ने धर्म एवं विज्ञान को सिक्के के दो पहलू निरूपित करते हुए कहा कि इन दोनों में सामंजस्य स्थापित करना आवष्यक है। अन्यथा किसी भी समाज की उन्नति नही हो सकती। डाॅ. सिंह ने कक्षाओं के दौरान एकपक्षीय संवाद पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि कक्षा में षिक्षक के साथ-साथ विद्यार्थियों की भी उतनी ही सहभागिता होनी चाहिए। डाॅ. सिंह ने गौहर रजा के व्याख्यान को महाविद्यालय के विद्यार्थियों हेतु मील का पत्थर करार दिया। व्याख्यान के अंत में हिन्दी के विभागाध्यक्ष डाॅ. अभिनेष सुराना ने धन्यवाद ज्ञापन किया। महाविद्यालय परिवार की ओर से गौहर रजा को श्रीफल, शाॅल एवं स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। इस अवसर पर प्रभाकर चैबे फाउण्डेषन रायपुर के अध्यक्ष श्री जीवेष चैबे भी उपस्थित थे। 

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