Photo Gallery

Photo Gallery: साहित्य पढ़ना जिम्मेदारी का काम है - डाॅ. सियाराम शर्मा

 

साहित्य पढ़ना जिम्मेदारी का काम है - डाॅ. सियाराम शर्मा


Venue : Govt. V.Y.T. PG AUTONOMOUS COLLEGE, DURG
Date : 12/04/2019
 

Story Details

साहित्य पढ़ना जिम्मेदारी का काम है - डाॅ. सियाराम शर्मा
साहित्य के विद्यार्थी को समाज जिम्मेदारी सौंपता है। आज साहित्य विषय पढ़ने विद्यार्थी मजबूरीवष आता है तो यह उसकी गलत सोच है। साहित्य पढ़ने के साथ तमाम दूसरे विषयों को जानना होता है। साहित्य से इतिहास की समझ जीवन की वास्तविकता और यथार्थ का ज्ञान होता है। इसलिए साहित्य के विद्यार्थी को इतिहास, दर्षन, मनोविज्ञान विज्ञान तथा समाजषास्त्र जैसे, सारे विषयों को पढ़ने की जरूरत है। साहित्य हमें समाज, देष और दुनिया से परिचित कराता है। हमारी दृष्टि विकसित करता है। साहित्य हममें धार पैदा करता है। हमारी अनुभूतियों को तीव्र कर हमें संवेदनषील इंसान बनाता है। 
उक्त विचार शासकीय विष्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वषासी महाविद्यालय दुर्ग के हिन्दी विभाग द्वारा हिन्दी साहित्य परिषद के उद्घाटन के अवसर पर मुख्यवक्ता सुप्रसिध्द युवा आलोचक डाॅ. सियाराम शर्मा ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आज का समय बड़ा क्रूर है। हमारा सिस्टम हमें संवेदनषील रोबोट में बदल रहा है। एल्विन टाफलर की किताब ष्फ्यूचर शाॅकष् का उल्लेख करते हुए कहा कि आज का समय मनी, माइन्ड और मसल्स का समय है। आज की व्यवस्था ने पूंजी और ताकत के बल पर ज्ञान सत्ता पर भी कब्जा जमा लिया है। वह विचार को, प्रतिपक्ष को खत्म कर देना चाहता है। 
एक समय था कुंभनदास जी ने सत्ता को चुनौती दी थी। महावीर प्रसाद द्विवेदी ने   ष्सम्पति.शास्त्रष् लिखकर प्रेमचंद ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौर से किसान-मजदूर को केन्द्र में ला दिया था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौर का समूचा साहित्य हासिए पर है। उसे फिर से समाज के केन्द्र में लाना होगा। 
समाज में असत्य, अन्याय के प्रति घृणा, क्रोध और कमजोर के प्रति करूणा का भाव जैसे शुक्ल जी ने जगाने की कोषिष की थी, उसे फिर से स्थापित करने की आवष्यकता है। साहित्य काल के पार जाता है। हम कुछ घंटों में इतिहास के पूरे कालखंड को देख सकते हैं। साहित्य हमारी संवेदना को जगाता है। मनुष्य को मनुष्य बनाये रखने के लिए साहित्य साहित्य जरूरी है। इसलिए साहित्य पढ़ना जिम्मेदारी का काम है। विद्यार्थी साहित्य को इसी दृष्टि से पढ़े और साहित्य से जीवन दृष्टि प्राप्त करें। 
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डाॅ. एम.ए. सिद्दीकी ने परिषद का उद्घाटन करते हुए परिषद के पदाधिकारियों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा जिन्हें भाषा और गणित नहीं आती उन्हें पुराने समय में पढ़ा-लिखा नहीं माना जाता था। इसलिए दोनों का ज्ञान जरूरी है। 
आज भाषा पर ध्यान नहीं दिया जाता है। विद्यार्थी अपनी भाषा पर भी ध्यान दें। परिषद के माध्यम से बौध्दिक आयोजन नियमित रूप से करें। पत्रिका का प्रकाषन करें। महाविद्यालय प्रषासन इसके लिए सहयोग करेंगा। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना तथा स्वागत गान से हुआ। विभाग की ओर से कार्यक्रम के अध्यक्ष प्राचार्य डाॅ. एम.ए.सिद्दीकी तथा मुख्य वक्ता डाॅ. सियाराम शर्मा शासकीय महाविद्यालय, उतई का स्वागत किया गया। परिषद के पदाधिकारियों की घोषणा तथा परिषद के गतिविधियों की जानकारी विभागाध्यक्ष डाॅ. अभिनेष सुराना ने दी। डाॅ. जय प्रकाष साव ने अतिथि वक्ता डाॅ. सियाराम शर्मा का परिचय दिया। कार्यक्रम में कु. भावना सिन्हा ने लघुकथा पाठ किया। कु. वंदना नायक ने छत्तीसगढ़ के गीतकार लक्ष्मण मस्तूरिहा पर आलेख पाठ तथा गीत प्रस्तुत किया। 
कार्यक्रम में हिन्दी विभाग के प्राध्यापक डाॅ. बलजीत कौर, श्री थानसिंह वर्मा, रजनीष उमरे, सरिता मिश्र विद्यार्थीगण  उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालना डाॅ. कृष्णा चटर्जी व आभार प्रदर्षन परिषद प्रभारी डाॅ. शंकर निषाद ने किया।  

साहित्य पढ़ना जिम्मेदारी का काम है - डाॅ. सियाराम शर्मा Photos