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Photo Gallery: साइंस कालेज, दुर्ग में दो दिवसीय सिम्पोजिया कार्यक्रम आयोजित वैज्ञानिक सोच विकसित करने पर ही पर्यावरण की सुरक्षा संभव

 

साइंस कालेज, दुर्ग में दो दिवसीय सिम्पोजिया कार्यक्रम आयोजित वैज्ञानिक सोच विकसित करने पर ही पर्यावरण की सुरक्षा संभव


Venue : Govt. V.Y.T. PG AUTONOMOUS COLLEGE, DURG
Date : 18/02/2019
 

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प्रेस विज्ञप्ति 

साइंस कालेज, दुर्ग में दो दिवसीय सिम्पोजिया कार्यक्रम आयोजित 
वैज्ञानिक सोच विकसित करने पर ही पर्यावरण की सुरक्षा संभव   

शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग में श्छत्तीसगढ़ में पर्यावरण,मानव व पेड़ पौधों के स्वास्थ्य की वर्तमान स्थितिश् विषय पर दो दिवसीय सिम्पोजिया के आयोजन का शुभारंभ आज हुआ। सीकाॅस्ट रायपुर एवं हेमचंद यादव विष्वविद्यालय, दुर्ग के संयुक्त तत्वावधान में होने वाले इस आयोजन के मुख्य अतिथि डाॅ. के. सुब्रमण्यम महानिदेषक-सीकाॅस्ट है एवं अध्यक्षता प्राचार्य डाॅ. एम.ए. सिद्दीकी, शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग ने की। इस सिम्पोजिया का मुख्य उद्देष्य सस्टेनेबल पर्यावरण की ओर मानव को प्रेरित करना, वैज्ञानिक जानकारियों का विकास, वैज्ञानिक प्रक्रियाओं  के बारे में ज्ञान देना एवं पर्यावरण का मानव व पेड़ पौघों पर प्रभाव से अवगत कराना है, ताकि पर्यावरण को अनुकूल एवं सस्टेनेबल बनाने में मदद मिलें और मानव जीवन के साथ सभी जीव जंतुओं पर उसका अनुकूल प्रभाव पड़े। कार्यक्रम में आमंत्रित सभी अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ द्वारा किया  गया। 
उद्घाटन समारोह में दीप प्रज्जवलन के साथ पर्यावरण जागरूकता की अलख जगाते हुए मुख्य अतिथि डाॅ. के. सुब्रमण्यम महानिदेषक-सीकाॅस्ट ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि हमारी पीढ़ी ने पर्यावरण को जो नुकसान पहुंचाया हैं उसकी क्षतिपूर्ति करने की जिम्मेदारी युवाओं के कंधों पर है। हमें चाहिए कि हम अपनी आवष्यकताओं को कम करें, ताकि प्रकृति का शोषण कम से कम हों। जीव जंतुओं की कई प्रजातियों को हम लुप्त कर चुके है। उत्तराखंड, कवर्धा, रायगढ़ केलो नदी के उदाहरण देते हुए उन्होंने पर्यावरण की भयावह स्थिति की ओर सबका ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि यदि हम अपने ज्ञानचक्षु को खोलकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण को विकसित नही करेंगेे तो हम अपने ही देष की संपदा से वंचित हो जायेगें। हमें ताउम्र  जिज्ञासु प्रवृत्ति को बनाया रखना होगा। केवल परीक्षा आधारित पढ़ाई की सोच से आगे समाज के लिए कुछ करने की प्रवृत्ति का जज्बा विकसित करना होगा। समझदार, षिक्षित बनना होगा। वर्षाजल को संचित करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि हम सबको संकल्प लेना होगा कि हर दिन हम पर्यावरण की रक्षा करेंगें। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डाॅ. एम.ए. सिद्दीकी, प्राचार्य, शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग ने विषय को प्रासंगिक बताते हुए कहा कि मानव की गतिविधियों से ही पर्यावरण में विपरीत प्रभाव पड़ रहे है, इस समस्या का हल इस सिम्पोजिया में जरूर निकलेगा ऐसी आषा है। व्यक्ति को स्वयं महसूस कर इस दिषा में अपनी भागीदारी सुनिष्चित करना चाहिए। वनों की अंधाधुंध कटाई के साथ प्रकृति से छेड़छाड़ हमारे अस्तित्व को समाप्त कर देगी। जंगल के कल्चर को महज वृक्षारोपण से विकसित नही किया जा सकता, नदियों के प्रवाह को मोड़ कर, उन पर बांध बनाकर उनके एवं जीव जंतुओं के अस्तित्व को बचाए रखने की कल्पना नही की जा सकती है। आवष्यक है कि प्रकृति से कम से कम छेड़छाड़ की जाये। जब हम सब प्रकृति की अहमियत को समझेगें, इसे परिवार, समाज और वैष्विक स्तर पर व्याप्त करेंगे तभी स्वस्थ पर्यावरण स्थापित होगा। इस कार्यक्रम की सफलता भी इसी में है। 
आयोजन के नोडल आॅफिसर डाॅ. अजय सिंह ने कार्यक्रम के उद्देष्य और इसकी आवष्यकता पर प्रकाष डालते हुए दो दिवसीय इस कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। कार्यक्रम की संयोजक डाॅ. अनुपमा अस्थाना ने मुख्य अतिथि के. सुब्रमण्यम जी का एकेडेमिक परिचय देते हुए शोधार्थियों एवं युवा वर्ग के लिए शुभकामनायें दी कि इस सिम्पोजिया से युवा पर्यावरण के प्रति जागरूक हो स्वस्थ जीवन की ओर अग्रसर हो। आयोजन के सचिव डाॅ. अनिल श्रीवास्तव ने डाॅ. सुब्रमण्यम जी के वनों एवं पर्यावरण के प्रति लगाव को व्यक्त करते हुए डाॅ. सुब्रमण्यम द्वारा स्वस्थ पर्यावरण की दिषा में किए जाने वाले विभिन्न उच्चस्तरीय कार्यो का उल्लेख किया। महाविद्यालय के प्राचार्य द्वारा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मान दिया गया। 
कार्यक्रम के तकनीकी सत्र के प्रथम दिवस में डाॅ. डी.एन. शर्मा, प्राध्यापक, रसायन कल्याण कालेज, भिलाई ने श्मानव मस्तिष्क में रसायनश् विषय पर रोचक व्याख्यान देते हुए युवाओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने जैविक क्रियाओं में हार्मोंस की भूमिका बताते हुए उनके असंतुलन के लिए असंतुलित पर्यावरण को जिम्मेदार बताया। इसलिए आवष्यक है, कि हम अपनी गतिविधियों द्वारा पर्यावरण को स्वस्थ बनाये। अतिथि वक्ता डाॅ. के.के.साहू जी ने नैनो मटेरियल द्वारा भारी धातुओं के विषैलेपन को दूर करने की विधियों के संबंध में जानकारी दी। आर्सेनिक की टाॅक्सिसिटी से अवगत कराते हुए उन्होंने भारी धातुओं का स्वास्थ्य से संबंध एवं पौधों पर इसके प्रभाव संबंधी जानकारी भी दी। 
सिम्पोजिया के द्वितीय सत्र में पोस्टर प्रेजंेटेषन का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने प्रस्तुति दी। 
कार्यक्रम का संचालन षिरीन अनवर एवं आषीष देवांगन ने किया। इस आयोजन में बड़ी संख्या में सभी विभागों के प्राध्यापक, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राऐं उपस्थित रहे। 

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