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Photo Gallery: साईंस कालेज, दुर्ग में उच्चशिक्षा विभाग की दुर्ग जिला क्वालिटी सर्किल की बैठक आयोजित उच्चशिक्षा की गुणवत्ता विकास हेतु प्राचार्यों एवं प्राध्यापकों ने दिए सुझाव

 

साईंस कालेज, दुर्ग में उच्चशिक्षा विभाग की दुर्ग जिला क्वालिटी सर्किल की बैठक आयोजित उच्चशिक्षा की गुणवत्ता विकास हेतु प्राचार्यों एवं प्राध्यापकों ने दिए सुझाव


Venue : Govt. V.Y.T. PG Autonomous College, Durg
Date : 12/10/2018
 

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उच्चशिक्षा की गुणवत्ता विकास हेतु शासन एवं निजी महाविद्यालयों की प्रबंधन समितियों को अनेक बिंदुओं पर विचार कर उसे लागू करना होगा। ये निष्कर्ष आज शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग में रवीन्द्रनाथ टैगोर सभागार में आयोजित दुर्ग जिले के 57 महाविद्यालयों के प्राचार्य, आईक्यूएसी समन्वयकों तथा नैक समन्वयकों की दुर्ग जिला क्वालिटी सर्किल की बैठक में सामने आया। बैठक की अध्यक्षता करते हुए उच्चशिक्षा विभाग दुर्ग संभाग के अपर संचालक एवं साईंस कालेज, दुर्ग के प्राचार्य डाॅ. एस.के. राजपूत ने कहा कि जिन महाविद्यालयों ने नैक द्वारा अपना मूल्यांकन नही कराया है। वे शीघ्र नैक मूल्यांकन हेतु अपना आवेदन प्रेंिषत करें। उच्चशिक्षा में गुणवत्ता विकास की दिशा में नैक मूल्यांकन को मील का पत्थर साबित करते हुए डाॅ. राजपूत ने शासकीय एवं निजी महाविद्यालयों से शासन तथा विश्वविद्यालयों के निर्देशों का अक्षरशः पालन करते हुए कार्य संपादन का आग्रह किया। 
क्वालिटी सर्किल की बैठक का आरंभ करते हुए साईंस कालेज, दुर्ग के प्रोफेसर प्रशांत श्रीवास्तव ने क्वालिटी सर्किल की बैठक का उद्देश्य तथा उसके कार्यवृत्त पर प्रकाश डाला। डाॅ. प्रशांत श्रीवास्तव ने पावर प्वाइंट प्रस्तुतिकरण के माध्यम से नैक की नई मूल्यांकन पध्दति का विस्तार से विश्लेषण किया। बैठक में उपस्थित अनेक महाविद्यालयों के प्राचार्यों एवं प्राध्यापकों ने नैक मूल्यांकन संबंधी प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासा का समाधान किया। अपने स्वागत भाषण में साईंस कालेज, दुर्ग के आईक्यूएसी समन्वयक डाॅ. जगजीत कौर सलूजा ने ईमानदारी पूर्वक आंकड़ों के प्रस्तुतिकरण तथा सामाजिक उत्थान हेतु महाविद्यालयों द्वारा किए जाने वाले विभिन्न कार्यों को सफलता का मूलमंत्र बताया। डाॅ. सलूजा ने आईक्यूएसी के कार्यों की भी जानकारी उपस्थित प्राध्यापकों को दी। यूजीसी सेल के संयोजक डाॅ. अनुपमा अस्थाना ने यूजीसी द्वारा दी जाने वाली अनुदान राशि के समय पर उपयोग तथा यूजीसी कार्यालय से आय-व्यय संबंधी नोड्यूज प्रमाण पत्र प्राप्त करने संबंधी विस्तृत जानकारी प्रदान की। बैठक के अंत में धन्यवाद ज्ञापन महाविद्यालय आईक्यूएसी की वरिष्ठ सदस्य डाॅ. पद्मावती ने किया। 
बैठक के द्वितीय चरण में छत्तीसगढ़ में उच्चशिक्षा का विजन 2025 विषय पर विभिन्न महाविद्यालय के प्रतिभागियों ने विचार रखें। सर्वप्रथम शासकीय कन्या महाविद्यालय, दुर्ग की प्राध्यापक डाॅ. अमीता सहगल ने नारी शिक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि प्रत्येक महाविद्यालय में पर्याप्त संख्या में प्राध्यापकों की नियुक्ति के साथ-साथ तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति भी होनी चाहिए। प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु जिले के किसी एक महाविद्यालय को केन्द्र बनाकर समस्त महाविद्यालयों के संबंधित विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। सेंट थाॅमस कालेज के डाॅ. अशोक कुमार मिश्रा ने विद्यार्थियों के स्किल डेव्हलपमेंट हेतु इन्टर्नशिप प्रणाली लागू करने पर जोर दिया। शासकीय दानवीर तुलाराम महाविद्यालय के डाॅ. अलीम खान ने अपने संबोधन में संस्थाओं के प्रमुखों से आग्रह किया कि वे देश प्रदेश के अन्य शैक्षणिक संस्थाओं के साथ एम.ओ.यू. स्थापित करें, जिससे दोनों संस्थाओं के विद्यार्थी लाभान्वित हो सके। एम.ज.े कालेज, भिलाई की प्राध्यापक डाॅ. श्वेता भाटिया ने शासकीय संस्थाओं के अनुरूप निजी संस्थाओं को भी छात्रहित में आयोजित की जाने वाली गतिविधियों के लिए अनुदान उपलब्ध कराने का आव्हान किया। स्वरूपानंद महाविद्यालय, हुडको भिलाई की प्राध्यापक द्वय डाॅ. ज्योति उपाध्याय एवं डाॅ. श्वेता दवे ने अपने संबोधन में निजी महाविद्यालयों में फैकल्टी के विकास हेतु राशि उपलब्ध कराये जाने की मांग की। डाॅ. श्वेता दवे ने विश्वविद्यालय के परीक्षा परिणाम निर्धारित समय में घोषित किए जाने पर भी बल दिया। उन्होंने एन.एस.एस. तथा योगा के नियमित प्रशिक्षक नियुक्त किए जाने की भी आवश्यकता बतायी। शंकराचार्य महाविद्यालय, जुनवानी के अतिरिक्त निदेशक डाॅ. दुर्गा प्रसाद राव ने अपने संबोधन मेें महाविद्यालयीन छात्रों हेतु ऐप के माध्यम से समस्त जानकारी उपलब्ध कराकर कागज के कम से कम उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण में योगदान का सुझाव दिया। शासकीय महाविद्यालय वैशाली नगर के प्राध्यापक डाॅ. रितेश अग्रवाल ने विद्यार्थियों के फीडबैक पर विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि दुर्ग जिले के समस्त महाविद्यालयों में विद्यार्थियों से फीडबैक लेने हेतु एक जैसा फीडबैक फार्मेट तैयार करना चाहिए। डाॅ. रितेश अग्रवाल ने गुणवत्ता विकास को मन से करने वाली गतिविधि बताया। 
इस अवसर पर दुर्ग जिले के शासकीय, शासकीय अनुदान प्राप्त तथा निजी महाविद्यालयों के प्राचार्य उपस्थित थे। इनमें वैशाली नगर कालेज की प्राचार्य डाॅ. अलका मेश्राम, खुर्सीपार महाविद्यालय की प्राचार्य डाॅ. रीना मजूमदार, भिलाई महिला महाविद्यालय की प्राचार्य डाॅ. जेहरा हसन, धनश्याम आर्य कन्या महाविद्यालय की प्राचार्य डाॅ. देवहुति तिवारी, शैलदेवी महाविद्यालय अण्डा की प्राचार्य डाॅ. सुमन बलियान, कल्याण लाॅ कालेज भिलाई की प्राचार्य डाॅ. सुशीला यादव तथा प्राध्यापक डाॅ. प्रमोद तिवारी, डाॅ. पी.बसंत कला, डाॅ. देवेश पटेल, डाॅ. जसवंत, डाॅ. अंशुमाला चन्दनगर, डाॅ. संजू सिन्हा, डाॅ. पूनम राजपूत, डाॅ. विभा शर्मा, डाॅ. सुनीता झा, डाॅ. सुभाष दास, डाॅ. हारून रसीद, डाॅ. जसबीर कौर, डाॅ. सुनीता पाड़ी, डाॅ. ममता दुबे, डाॅ. शिखा विनोद, डाॅ. मीना चक्रवर्ती, डाॅ. अर्चना त्रिपाठी, डाॅ. एल.के. देवांगन आदि उपस्थित थे। 

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