Photo Gallery

Photo Gallery: साइंस कालेज दुर्ग में दुर्ग वि.वि. द्वारा विज्ञान विषयों का लोक व्यापीकरण कार्यक्रम आयोजित विद्यार्थियों में अध्ययन के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण आवश्यक - के. सुब्रमण्यम

 

साइंस कालेज दुर्ग में दुर्ग वि.वि. द्वारा विज्ञान विषयों का लोक व्यापीकरण कार्यक्रम आयोजित विद्यार्थियों में अध्ययन के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण आवश्यक - के. सुब्रमण्यम


Venue : Govt. V.Y.T. PG Autonomous College, Durg
Date : 29/01/2018
 

Story Details

विद्यार्थियों में अध्ययन के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण आवश्यक होता है। विद्यार्थियों को विषय के साथ-साथ व्यवहारिक ज्ञान एवं समसामयिक परिस्थितियों की भी जानकारी होना चाहिए। ये उद्गार छत्तीसगढ़ कौंसिल आॅफ साईंस एण्ड टेक्नालाॅजी के महानिदेशक डाॅ. के. सुब्रमण्यम ने आज व्यक्त किये। श्री सुब्रमण्यम आज शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग के रवीन्द्रनाथ टैगोर सभागार में सीकाॅस्ट द्वारा प्रायोजित एवं दुर्ग विश्वविद्यालय के तत्वावधान में साईंस कालेज, दुर्ग के रसायन एवं बायोटेक्नालाॅजी विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित दो दिवसीय सिम्पोजिया में मुख्य अतिथि के रूप में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। श्री सुब्रमण्यम ने कहा कि आज विकास के साथ-साथ पर्यावरण को संरक्षित रखना भी आवश्यक है। हमें अपने पुरखों की विरासत को संजोकर रखना होगा। उन्होंने सूचना से ज्ञान को पृथक कर समाज के हित में उसके प्रयोग की सलाह दी। ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन तथा रायगढ़ जिले के प्रदूषण का भी श्री सुब्रमण्यम ने अपने उद्बोधन में विस्तार से उल्लेख किया। 
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए दुर्ग विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. एन.पी. दीक्षित ने अमीर खुसरो की कविता का उदाहरण देते हुए कहा कि प्राकृतिक रूप से निर्मित वनों की तुलना वृक्षारोपण द्वारा नही की जा सकती, वृक्षारोपण के दौरान हम कुछ विशेष प्रजाति के पौधो को ही रोपित करते हैं, जबकि प्राकृतिक वन में असंख्य प्रजातियां उपस्थित होती है। डाॅ. दीक्षित ने उपस्थित विद्यार्थियों से ऊर्जा के नये स्त्रोतो का पता लगाने का आग्रह किया। साईंस कालेज, दुर्ग के प्राचार्य डाॅ. एस.के. राजपूत ने सीकाॅस्ट एवं दुर्ग विश्वविद्यालय द्वारा स्थापित समन्वय सेल की स्थापना की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों के जरिये विद्यार्थियों को विज्ञान की मुख्य धारा में पुनः जोड़ा जा सकता है। सिम्पोजिया की संयोजक डाॅ. अनुपमा अस्थाना ने सिम्पोजिया में उपस्थित अतिथियों एवं आमंत्रित वक्ताओं का परिचय देते हुए सिम्पोजिया के विषय की महत्ता प्रतिपादित की। कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डाॅ. अजय सिंह ने कार्यक्रम की विषय-वस्तु पर प्रकाश डालते हुए दुर्ग विश्वविद्यालय के विज्ञान लोक व्यापीकरण कार्यक्रम की महत्ता का विश्लेषण किया। आयोजन सचिव डाॅ. अनिल कुमार ने विभिन्न तकनीकी सत्रों के आमंत्रित व्याख्यान संबंधी विषय एवं पोस्टर प्रतियोगिता तथा माॅडल प्रदर्शिनी के नियमों की जानकारी दी। उद्घाटन सत्र का संचालन डाॅ. संजू सिन्हा ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डाॅ. प्रशांत श्रीवास्तव ने किया। 
आज आयोजित दो तकनीकी सत्रों में पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय ,रायपुर की बायोसाईंस की प्राध्यापक डाॅ. आरती परगनिहा ने क्रोनोबायोलाॅजी पर आधारित आमंत्रित व्याख्यान दिया। अपने व्याख्यान में डाॅ. परगनिहा ने मानव जीवन की बायोलाॅजीकल घड़ी के महत्व एवं उसकी उपयोगिता पर सारगर्भित व्याख्यान दिया। डाॅ. परगनिहा ने कैंसर रोग के संबंध में अपना व्याख्यान देते हुए जानकारी दी कि 25 से 35 वर्ष की आयु में महिलाओं को सबसे ज्यादा कैंसर ग्रस्त पाया गया है। हमारी बदलती जीवन शैली एवं आधुनिकता की आड़ में हम प्रकृति से दूर होकर प्रदूषक तत्वों के मध्य घिरे रहने के कारण कैंसर जैसी जानलेवा बिमारी के शिकार हो रहे है। डाॅ. आरती के व्याख्यान के दौरान छात्राओं ने अनेक प्रश्न पूछकर महिलाओं को होने वाली कैंसर संबंधी बिमारी के बचाव पर आधारित प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासा को शांत किया।
द्वितीय आमंत्रित व्याख्यान में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के प्रोफेसर एस.एल. स्वामी ने प्राकृतिक संसाधन के प्रबंधन एवं संधृत विकास पर पावर पाइंट प्रेजेटेंशन के माध्यम से जानकारी दी कि अर्थव्यवस्था, समाज एवं पर्यावरण के मध्य सामंजस्य आवश्यक है। डाॅ. स्वामी ने भूमि, वन, जल, खाद्य, खनिज एवं ऊर्जा स्त्रोतों के अतिदोहन एवं उसके दुष्प्रभावों का विस्तार से विश्लेषण किया। डाॅ. मौसमी डे ने तकनीकी सत्रों का संचालन किया। अतिथियों को स्मृति चिन्ह प्रदान करने वाले लोगों में प्राचार्य डाॅ. राजपूत एवं प्राणीशास्त्र के विभागाध्यक्ष डाॅ. कांति चैबे शामिल थी। इससे पूर्व आकांक्षा एवं साथियों द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना एवं सरस्वती पूजन के साथ आरंभ हुए सिम्पोजिया में अतिथियों का स्वागत डाॅ. रंजना श्रीवास्तव, डाॅ. अनुपमा अस्थाना, डाॅ. अनिल कुमार, डाॅ. जगजीत कौर सलूजा तथा डाॅ. प्रशांत श्रीवास्तव ने किया। 
सायं कालीन सत्र में शोधार्थियों एवं स्नातकोत्तर छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत पोस्टर का प्रदर्शन महाविद्यालय के इंडोर हाॅल में किया गया। भौतिक, रासायनिक, जैविकीय, गणित के दैनिक जीवन में अनुप्रयोग, पर्यावरण एवं स्वास्थ्य तथा प्राकृतिक संसाधनों का दोहन विषय पर आधारित इस पोस्टर प्रतियोगिता में दुर्ग जिले के विभिन्न महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। सिम्पोजिया के नोडल अधिकारी डाॅ. अजय सिंह एवं आयोजन सचिव डाॅ. अनिल कुमार ने बताया कि दिनांक 30 जनवरी को सिम्पोजिया के द्वितीय एवं आखिरी दिन आमंत्रित व्याख्यान के साथ-साथ शोधकर्ता एवं विभिन्न महाविद्यालयों के स्नातकोत्तर कक्षाओं के विद्यार्थी मौखिक प्रस्तुतिकरण देगें। प्रत्येक विधा में प्रथम तीन स्थान प्राप्त करने वाले विजेताओं को पुरस्कृत किया जायेगा। स्नातक स्तर के विद्यार्थी माॅडल प्रदर्शिनी में हिस्सा लेगें। आज आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका निभाने वालों में कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के डाॅ. प्रज्ञापति, धरसींवा महाविद्यालय के डाॅ.के.के. शर्मा तथा शासकीय महाविद्यालय चैकी के भौतिकी के प्राध्यापक डाॅ. आर.एस.सिंह शामिल थे। सिम्पोजिया के आयोजन में डाॅ. अलका मिश्रा, डाॅ. विजय लक्ष्मी नायडू, डाॅ. रेखा गुप्ता, डाॅ. अभिषेक मिश्रा, डाॅ. दिलीप साहू, डाॅ. निखिल मिश्रा, डाॅ. श्रीनिवास देशमुख, डाॅ. प्रज्ञा कुलकर्णी, डाॅ. जय प्रकाश साव, डाॅ. सतीश सेन, डाॅ. मौसमी डे, डाॅ. संजू सिन्हा, डाॅ. प्रशांत श्रीवास्तव का उल्लेखनीय योगदान रहा। 

साइंस कालेज दुर्ग में दुर्ग वि.वि. द्वारा विज्ञान विषयों का लोक व्यापीकरण कार्यक्रम आयोजित विद्यार्थियों में अध्ययन के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण आवश्यक - के. सुब्रमण्यम Photos