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Photo Gallery: साइंस कालेज दुर्ग में इंस्पायर इंटर्नशिप साइंस कैम्प 2017 उद्घाटित विश्लेषण क्षमता एवं जिज्ञासु प्रवृति विद्यार्थियों की सफलता का मूलमंत्र- डॉ. दीक्षित

 

साइंस कालेज दुर्ग में इंस्पायर इंटर्नशिप साइंस कैम्प 2017 उद्घाटित विश्लेषण क्षमता एवं जिज्ञासु प्रवृति विद्यार्थियों की सफलता का मूलमंत्र- डॉ. दीक्षित


Venue : Govt. V.Y.T. PG Autonomous College, Durg
Date : 24/11/2017
 

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विश्लेषण क्षमता एवं जिज्ञासु प्रवृति विद्यार्थियों की सफलता का मूलमंत्र है, विद्यार्थियों को हमेशा वैज्ञानिक सोच के माध्यम से तथ्यों को सत्यापित करने का प्रयत्न करना चाहिए।  ये उद्गार दुर्ग विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एन.पी. दीक्षित ने आज शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग में व्यक्त किये। डॉ. दीक्षित आज महाविद्यालय में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित एवं दिनांक 24 नवम्बर से 28 नवम्बर तक आयोजित डीएसटी इंस्पायर इंटर्नशिप साइंस कैम्प 2017 के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। छत्तीसगढ़ के दूरस्थ अंचलों बस्तर, सरगुजा, सूरजपुर, विश्रामपुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, कोरबा, राजनांदगांव, कवर्धा आदि क्षेत्रों के विज्ञान संकाय के लगभग 200 से अधिक हायर सेकेण्डरी स्तर के 11वीं कक्षा के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए प्रोफेसर दीक्षित ने कहा कि हर इंसान अपने अंदर लगन और प्रयास जागृत कर सकता है। क्यों और कैसे की भावना हमें सदैव आगे बढ़ाती है। विद्यार्थियों में ज्ञान की पिपासा होनी चाहिए। डॉ. दीक्षित ने हवाई जहाज के आविष्कारक राइट बंधुओं को उदाहरण देते हुए विद्यार्थियों को प्रेरणादायी उद्बोधन दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद रायपुर के महानिदेशक श्री के.सुब्रमण्यम ने अपने संबोधन में डीएसटी द्वारा प्रायोजित इंस्पायर प्रोग्राम को शालेय विद्यार्थियों के विकास में एवं विज्ञान की ओर उनमें रूचि उत्पन्न करने हेतु अत्यंत उपयोगी बताया। श्री सुब्रमण्यम ने कहा कि इंस्पायर प्रोग्राम का मुख्य उद्देश्य भारत में उपस्थित टैलेंट को मार्गदर्शन प्रदान करना है। उन्होंने विद्यार्थियों से आव्हान किया कि अंधविश्वास एवं अंधश्रध्दा को तार्किक दृष्टिकोण रखकर नकराना आवश्यक है। परिकल्पनाओं से सिध्दांत बनता है और यही सिध्दांत कालांतर में नियम बन जाता है। वैज्ञानिक नियमों में निरंतर परिवर्तन एवं सुधार की संभावना बनी रहती है। डॉ. सुब्रमण्यम ने मनुष्यों में होने वाले मलेरिया एवं मस्तिष्क ज्वर जैसी बिमारियों के कारण एवं उनसे बचने के उपायों संबंधी नवीनतम शोध कार्यों का रोचक विश्लेषण किया। डॉ. सुब्रमण्यम के व्याख्यान में विद्यार्थियों की देर तक तालियां बजती रही। 
इससे पूर्व अपने स्वागत भाषण में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एस.के. राजपूत ने कहा कि इस महाविद्यालय में इंस्पायर कैम्प दूसरी बार आयोजित हो रहा है। डॉ. राजपूत ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि गतवर्ष महाविद्यालय में आयोजित इंस्पायर कैम्प में छत्तीसगढ़ के जिन शालेय विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया था, उन सभी ने अपनी-अपनी कक्षाओं में उच्च अंक अर्जित किये हैं। विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच उत्पन्न करने तथा उन्हें विषयों के नवीनतम ज्ञान उपलब्ध कराने के लिए डीएसटी द्वारा इंस्पायर प्रोग्राम की शुरूवात की गयी है। इस अवसर पर प्रकाशित स्मारिका का विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया। 
महाविद्यालय जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष श्री मनोज शर्मा ने इंस्पायर प्रोग्राम के आयोजन को महाविद्यालय के इतिहास में मील का पत्थर बताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के सुदूर अंचलों से आये विद्यार्थियों के लिए आईआईटी स्तर के प्राध्यापकों से सीधा संवाद का अवसर निश्चित रूप से उन्हें जीवन भर प्रेरणा के रूप में याद रहेगा। उन्होंने जनभागीदारी समिति की तरफ से समस्त विद्यार्थियों एवं उनके शिक्षकों का स्वागत किया। इस अवसर पर महाविद्यालय जनभागीदारी समिति के सदस्य श्री सतीश समर्थ एवं श्री सुनील जैन भी उपस्थित थे। 
कार्यक्रम के संचालक डॉ. जय प्रकाश साव ने विद्यालयीन विद्यार्थियों हेतु आयोजित होने वाले इंस्पायर प्रोग्राम की विषय वस्तु पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ प्रदेश के विभिन्न जिलों के ऐसे छात्र-छात्रायें हिस्सा ले रहे है, जिन्होंने 10 वीं बोर्ड की परीक्षा 2016-17 में (छ.ग. बोर्ड में 85 प्रतिशत/सी.बी.एस.ई. ।1 सी.जी. पी.ए./आई.सी.एस.ई. में 90 प्रतिशत अंक अर्जित किये हैं। अर्थात् जो वर्तमान शिक्षण सत्र में कक्षा 11 वीं के विज्ञान संकाय नियमित विद्यार्थी हो। इस प्रोग्राम में छत्तीसगढ़ प्रदेश के शहरी एवं ग्रामीण अंचलों के लगभग 200 छात्र-छात्रायें शामिल है। सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत के साथ आरंभ हुए उद्घाटन समारोह में महाविद्यालय के विद्यार्थी राजन सिंह राजपूत, शुभांगी झा, निशा सिंह, राहुल साहू एवं तबले पर छत्रपाल ने सहभागिता की। अतिथियों का पुष्पगुच्छ से स्वागत करने वालों में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एस.के. राजपूत तथा सहायक समन्वयक डॉ. अनिल कुमार, डॉ. अजय सिंह एवं डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव शामिल थे। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन सहायक समन्वयक डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव ने किया। डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि अतिथिद्वय कुलपति डॉ. दीक्षित एवं सीकॉस्ट के डायरेक्टर जनरल डॉ. के. सुब्रमण्यम साइंस कालेज दुर्ग के पूर्व प्राध्यापक रह चुके है। प्राचार्य डॉ. राजपूत एवं जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष श्री मनोज शर्मा ने अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किये। 
उद्घाटन समारोह के पश्चात् आयोजित तकनीकी सत्रों में प्रथम व्याख्यान भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र मुबंई के डॉ. गुलशन रेलहान का हुआ। डॉ. रेल्हान ने पिछली सदी में परमाणु अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान करने वाले वैज्ञानिको एवं उनके द्वारा किये गये शोध कार्यों की विस्तृत जानकारी बड़ी संख्या में उपस्थित विद्यार्थियों को दी। छत्तीसगढ़ के दूरस्थ अंचलों के विद्यार्थियों ने अनेक प्रश्न पूछकर अपनी-अपनी जिज्ञासा का समाधान किया। डॉ. रेल्हान ने मैडम क्यूरी, आईन्स्टीन आदि प्रसिध्द वैज्ञानिकों के जीवन शैली एवं परमाणु अनुसंधान, रेडियो एक्टिविटी तथा भौतिक शास्त्र से जुड़ी उल्लेखनीय खोज की रोचक जानकारी भी दी। 
द्वितीय तकनीकी सत्र में इंस्ट्यूट ऑफ साइंस मुबंई के विजय मेंदुलकर ने बायो पॉलीमर के विकल्प के रूप में बायो प्लास्टिक की नवीनतम जानकारी विद्यार्थियों को दिये। डॉ. मेंदुलकर ने सिन्थेटिक पॉलीमर वर्तमान युग में कांच, लकड़ी, पेपर एवं धातु का विकल्प बताते हुए कहा कि आज प्र्रत्येक समय में हम प्लास्टिक के उपयोग से छूते नही रह पाते, परंतु इस विषय में अब जागरूकता बढ़ रही है तथा पर्यावरण को होने वाले नुकसान को ध्यान में रखते हुए प्लास्टिक के उपयोग में निरंतर कमी आ रही है। अब हमें जैव अपघटित पालीमर पदार्थों की ओर अपना ध्यान केन्द्रित करना होगा। डॉ. मेंदुलकर के व्याख्यान को ग्र्रामीण अंचल के विद्यार्थियों ने अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि उनके द्वारा दी जानकारी हमें पहली बार मिली हमें इससे पूर्व इस प्रकार की उन्नत जानकारी का ज्ञान नही था। 
इंस्पायर प्रोग्राम के सहायक समन्वयक डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव ने बताया कि इंस्पायर कैम्प के प्रथम दिन जिला अस्पताल दुर्ग एवं मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी दुर्ग के सौजन्य से प्रतिभागी विद्यार्थियों की नेत्र जांच भी की गयी तथा जिन विद्यार्थियों को चश्मे की आवश्यकता विशेषज्ञों द्वारा बतायी गयी उन्हें महाविद्यालय द्वारा चश्मे भी उपलब्ध कराये जायेंगे। नेत्र परीक्षण शिविर का दायित्व डॉ. रंजना श्रीवास्तव एवं डॉ. गायत्री पाण्डेय ने संभाला। इंस्पायर कैम्प के दो अन्य सहायक समन्वयकों डॉ. अनिल कुमार एवं डॉ. अजय सिंह ने जानकारी दी, कि इन्स्पायर कैम्प के दूसरे दिन 25 नवम्बर को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के डॉ. अली मोहम्मद, आईआईटी रूढ़की के डॉ. धर्मेन्द्र सिंह तथा दिल्ली के डॉ. विजय गुप्ता का व्याख्यान होगा। व्याख्यान के पश्चात् विद्यार्थियों को जैव विविधता संबंधी जानकारी देने तथा वन्य प्राणी संरक्षण संबंधी जागरूकता उत्पन्न करने हेतु महाविद्यालय के प्राध्यापकों के निर्देशन में समस्त प्रतिभागी विद्यार्थियों को मैत्री बाग का भ्रमण कराया जायेगा। 

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