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Photo Gallery: कर्मचारियों एवं प्राध्यापकों हेतु मनोविज्ञान पर कार्यषाला

 

कर्मचारियों एवं प्राध्यापकों हेतु मनोविज्ञान पर कार्यषाला


Venue : Govt. V.Y.T. PG AUTONOMOUS COLLEGE, DURG
Date : 20/02/2020
 

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अत्याधिक अपेक्षा मानसिक तनाव का कारण - डाॅ. उषा किरण अग्रवाल 

किसी भी संदर्भ में अत्याधिक अपेक्षा रखना हमारे मानसिक तनाव का प्रमुख कारण होता है। हमें परिस्थितियों एवं वास्तविकता को स्वीकार करते हुए अपनी सोच एवं व्यवहार परिवर्तित करना चाहिए। ये उद्गार शासकीय कन्या महाविद्यालय, देवेन्द्र नगर, रायपुर की मनोविज्ञान विषय की प्राध्यापक डाॅ. उषा किरण अग्रवाल ने आज शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग में नवनियुक्त एवं शासन द्वारा अतिथि प्राध्यापक के रूप में नियुक्त सहायक प्राध्यापक तथा महाविद्यालय जनभागीदारी समिति द्वारा मानदेय पर अध्यापन करने वाले सहायक प्राध्यापक एवं कर्मचारियों हेतु आईक्यूएसी द्वारा पृथक-पृथक आयोजित कार्यषाला में मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त किये। डाॅ. अग्रवाल ने बड़ी संख्या में उपस्थित सहायक प्राध्यापकों को संबोधित करते हुए कहा कि हमें कक्षा में विद्यार्थियों की मनोवैज्ञानिक स्थिति जानना आवष्यक है। किसी विद्यार्थी का कक्षा में व्यवहार अनेक बातों पर निर्भर करता है। इसमें उसकी आर्थिक स्थिति, पारिवारिक दषा, संगत तथा स्वयं की बौध्दिक क्षमता आदि प्रमुख घटक होतेे है। यदि कोई षिक्षक विद्यार्थी से मित्रता पूर्ण सौम्य व्यवहार कर उसकी परेषानी को जान लें तो उसके निराकरण हेतु प्रयास किया जा सकता है। पावर प्वाइंट प्रस्तुतिकरण के माध्यम से अपने विचारों को डाॅ. अग्रवाल ने अनेक उदाहरणों के माध्यम से प्रभावषाली ढंग से प्रस्तुत किया। डाॅ. अग्रवाल के व्याख्यान के दौरान प्रतिभागी प्राध्यापकों का साॅयको मैट्रिक टेस्ट भी किया गया। 
इससे पूर्व महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. आर.एन. सिंह ने प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों हेतु मनोवैज्ञानिक टेस्ट को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि समय-समय पर षिक्षकों को स्वयं की दक्षता एवं मानसिक तनाव का आकलन करते रहना चाहिए। कर्मचारियों द्वारा कार्यषाला में रचनात्मक सहभागिता की प्रषंसा करते हुए डाॅ. सिंह ने कहा कि कर्मचारियों हेतु भविष्य में भी इस प्रकार की कार्यषालायें आयोजित की जायेगी। कार्यक्रम के संयोजक डाॅ. एम.ए. सिद्दीकी ने षिक्षकों हेतु स्वस्थ मस्तिष्क एवं स्वस्थ शरीर को मूलभूत आवष्यकता बताते हुए कहा कि षिक्षकों अपनी कक्षा के पूर्व विषय के गहन अध्ययन के साथ-साथ कक्षा हेतु मानसिक रूप से भी तैयार रहना चाहिए। कार्यक्रम की संचालक डाॅ. तरलोचन कौर संधू ने कार्यषाला की विषय-वस्तु पर प्रकाष डाला। अंत में धन्यवाद ज्ञापन डाॅ. प्रषांत श्रीवास्तव ने किया। पर्यावरण संरक्षण के संदेष के साथ प्राचार्य डाॅ. सिंह ने स्मृति चिन्ह के रूप में डाॅ. अग्रवाल को पौधा एवं पुस्तकें भेंट की। 
प्राध्यापकों की कार्यषाला की द्वितीय सत्र में कल्याण महाविद्यालय के डाॅ. पापा राव ने षिक्षण को प्रभावी बनाने के तौर-तरीको पर परिचर्चा की। इन्होंने 21वीं सदी में षिक्षकों के कार्य एवं दायित्व को विस्तार पूर्वक समझाया। डाॅ. पापा राव ने बताया कि षिक्षकों की जिम्मेदारी न केवल प्रैक्टिकल थीकिंग को विकसित करने की है, बल्कि विद्यार्थियों के बीच में आदर्ष प्रस्तुत करने की भी है। डाॅ. पापा राव के अनुसार प्रत्येक षिक्षक को निरंतर अपने अध्यापन की गुणवत्ता बढ़ाने हेतु प्रयासरत् रहना चाहिए। इस अवसर पर आयोजन समिति के सदस्य डाॅ. उषा साहू, डाॅ. अनीता शुक्ला, डाॅ. तरलोचन कौर संधू, डाॅ. अभिषेक मिश्रा, डाॅ. सीतेष्वरी चन्द्राकर तथा डाॅ. अष्विनी महाजन एवं डाॅ. प्रषांत श्रीवास्तव उपस्थित थे। 
कर्मचारियों हेतु आईक्यूएसी द्वारा आयोजित कामकाज के बढ़ते मानसिक दबाव विषय पर एक दिवसीय कार्यषाला में कर्मचारियों के मानसिक तनाव स्तर का मापन डाॅ. उषा किरण अग्रवाल ने किया। साईंस कालेज, दुर्ग के लगभग 20 प्रतिषत कर्मचारी तनाव की अधिकतम सीमा से उपर, 50 प्रतिषत कर्मचारी तनाव की सीमा के नीचे तथा 30 प्रतिषत तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तनावहीन साबित हुये। डाॅ. अग्रवाल ने उपस्थित कर्मचारियों को सलाह दी कि वे उन्हें सौंपे गये कार्यों का प्रसन्नतापूर्वक संपादन करें। मानसिक तनाव के कारण हमें शारीरिक हानि भी होती है साथ ही इसका असर पूरे परिवार पर पड़ता है। डाॅ. अग्रवाल के व्याख्यान के दौरान कर्मचारियों ने अपने मनोवैज्ञानिक एवं मानसिक तनाव पर गहन चर्चा की। डाॅ. उषा किरण अग्रवाल ने कर्मचारियों को तनाव रहित रहने हेतु अनेक सुझाव दिये। महाविद्यालय के प्रयोगषाला तकनीषियन श्रीमती प्रतिभा श्रीवास्तव ने कर्मचारियों की ओर से अपनी बात रखी। महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डाॅ. प्रशांत श्रीवास्तव ने डाॅ. उषा किरण अग्रवाल का परिचय देते हुए कर्मचारियों हेतु कार्यषाला की आवष्यकता पर अपने विचार प्रस्तुत किये। कार्यषाला के अंत में धन्यवाद ज्ञापन श्री राजेष श्रीवास्तव ने किया। 

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