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Photo Gallery: कविता मनुष्यता की मातृभाषा है विज्ञान महाविद्यालय में कविता कार्यषाला ‘युवा सृजन की दिषाए‘ सम्पन्न

 

कविता मनुष्यता की मातृभाषा है विज्ञान महाविद्यालय में कविता कार्यषाला ‘युवा सृजन की दिषाए‘ सम्पन्न


Venue : Govt. V.Y.T. PG AUTONOMOUS COLLEGE, DURG
Date : 20/02/2020
 

Story Details

शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग के हिंदी विभाग के तत्वावधान में कविता-कार्यषाला ‘युवा सृजन की दिषाएॅं‘ आयोजित की गई। कार्यषाला में महाविद्यालय के विद्यार्थियों के अलावा शासकीय वा.वा. पाटणकर कन्या महाविद्यालय, दुर्ग, कल्याण महाविद्यालय भिलाई नगर, महिला महाविद्यालय, भिलाई नगर, शासकीय महाविद्यालय, उतई, श्री शंकराचार्य महाविद्यालय, भिलाई, सेठ रतनचंद सुराना महाविद्यालय, दुर्ग सेंट थाॅमस महाविद्यालय भिलाई के विद्यार्थियों ने भाग लिया। 
कार्यषाला का उद्घाटन महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ.आर.एन.सिंह तथा शास.कन्या महाविद्यालय, दुर्ग के प्राचार्य डाॅ. सुषीलचन्द्र तिवारी ने संयुक्त रूप से किया। हिंदी विभागाध्यक्ष डाॅ. अभिनेष सुराना ने स्वागत भाषण दिया तथा कार्यषाला के उद्देष्य पर प्रकाष डाला। कार्यषाला में विषय विषेषज्ञ के रूप में हिंदी के प्रख्यात समालोचक डाॅ. सियाराम शर्मा, कवि डाॅ. आलोक वर्मा, संजय शाम, नंदकुमार कंसारी, डाॅ. विनोद शर्मा तथा समालोचक डाॅ. अम्बरीष त्रिपाठी ने मार्गदर्षन दिया। 
प्रथम सत्र में डाॅ. सियाराम शर्मा ने ‘कविता की जरूरत‘ विषय पर बीज वक्तव्य दिया। उन्होंने हिन्दी कविता की परम्परा, सृजन-प्रक्र्रिया तथा संचार प्रणाली पर विस्तार से चर्चा की। वर्तमान समय और उसमें सक्रिय सामाजिक शक्तियों के मनुष्यद्रोही रूप का खुलासा करते हुए उन्होंने कविता की प्रासंगिकता को रेखांकित किया तथा कहा कि कविता सदैव सत्य के पक्ष में खड़ा होती है। वह मनुष्यता की मातृभाषा है। 
कार्यषाला में विभिन्न महाविद्यालयों के चालीस से अधिक प्रतिभागी कवियों ने अपनी कविताओं का पाठ किया। कविताओं पर डाॅ. सियाराम शर्मा, प्रो. थानसिंह वर्मा, डाॅ. अम्बरीष त्रिपाठी ने समीक्षात्मक टिप्पणी प्रस्तुत की। उन्होंने नवोदित कवियों की रचनाओं की भाषा और विषयवस्तु संबंधी त्रुटियों को रेखांकित कर परिमार्जन और संषोधन के उपाय सुझाए। उन्होंने कविता लिखनेे के पूर्व की तैयारी के तौर पर पूर्वज और समकालीन कवियों की रचनाओं के बारम्बार पाठ करने की आवष्यकता पर विषेष जोर दिया। 
द्वितीय सत्र में ‘कविता का संग साथ‘ के अंतर्गत डाॅ. आलोक वर्मा, संजय शाम, नन्दकुमार कंसारी तथा डाॅ. विनोद शर्मा ने काव्य सृजन की ओर उन्मुख होने तथा कविता के प्रति अभिरूचि के विकास के निजी अनुभव पर केंद्रित संस्मरण सुनाए। उन्होंने अपनी कविताओं का पाठ भी किया। उनकेे अतिरिक्त हिंदी विभाग के प्राध्यापक डाॅ. रजनीष उमरे तथा प्रो. प्रियंका यादव ने भी अपनी कविताएं प्रस्तुत की। 
काव्यपाठ प्रस्तुत करने वाले नवोदित छात्र कवियों में मुकेष (शास.नवीन महाविद्यालय, खुर्सीपार) कमल नारायण बंजारे, प्रगति साहू, योगेन्द्र कुमार अंगारे, तुषार पाटिल, हितेष कुमार, लुकेष कुमार (शास.महाविद्यालय, उतई), शुभ्रा गंधर्व, परषुराम रे, अंकिता शर्मा (श्री शंकराचार्य महाविद्यालय जुनवानी) विभा कसेर, प्रज्ञा मिश्रा, मोनिका यादव (शास.कन्या महाविद्यालय, दुर्ग) संयुक्ता पाढ़ी, प्रिया अग्रवाल (महिला महाविद्यालय, भिलाई) दिव्यारानी पाण्डेय, तैयबा शाह, तनवीर तबस्सुम, नंद किशोर, जे. लता, मोनिका साहू (कल्याण महाविद्यालय, भिलाई) अमित टंडन, देवश्री, जितेन्द्र कुमार, लेविष कुमार, नेहा साहू, भूपेष साहू, आषीष देवांगन, रवि कुमार देषमुख, राम सागर वर्मा, मुकेष्वर कुर्रे, वैष्णवी याज्ञिक, प्रतीक्षा तिवारी, प्रगति अग्रवाल, पुष्पेन्द्र साहू, मोहनदास, मोहित माइकल बी (शास.विज्ञान महाविद्यालय, दुर्ग) धनष्याम सोनी, प्रकाष कष्यप (रतनचंद सुराना महाविद्यालय, दुर्ग) गुरजीत सिंह (सेंट थामस महाविद्यालय, भिलाई) सम्मिलित हैं। 
अंत मे प्रतिभागियों ने कार्यषाला से संबंधित अपने अनुभव साझा किये तथा आयोजन को प्रेरक और ज्ञानवर्धक निरूपित किया। हिन्दी के वरिष्ठ प्राध्यापक डाॅ. शंकर निषाद ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम का संचालन विभाग के सदस्य डाॅ. रजनीष उमरे ने किया। आयोजन की सफलता में डाॅ. बलजीत कौर, डाॅ. कृष्णा चटर्जी, डाॅ. जय प्रकाष साव के अलावा स्नातकोत्तर छात्र-छात्राओं ने योगदान दिया।

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