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Photo Gallery: बायोटेक्नालाॅजी विभाग द्वारा डी.एन.ए. बार कोडिंग पर 3 दिवसीय वर्कषाप का आयोजन

 

बायोटेक्नालाॅजी विभाग द्वारा डी.एन.ए. बार कोडिंग पर 3 दिवसीय वर्कषाप का आयोजन


Venue : Govt. V.Y.T. PG AUTONOMOUS COLLEGE, DURG
Date : 10/02/2020
 

Story Details

शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग के बायोटेक्नालाॅजी विभाग द्वारा एटीजी लैब पुणे के सौजन्य से तीन दिवसीय कार्यषाला दिनांक 10 से 12 फरवरी तक आयोजित की गई है। डी.एन.ए. बारकोडिंग पर आयोजित इस कार्यषाला में बायोटेक्नालाॅजी विभाग के स्नातकोत्तर छात्र-छात्राऐं हिस्सा ले रहे है। आज कार्यषाला के उद्घाटन अवसर पर प्रारंभ में बायोटेक्नालाॅजी विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. अनिल श्रीवास्तव ने डी.एन.ए. बारकोडिंग के महत्व पर विस्तार से प्रकाष डाला। डाॅ. अनिल कुमार ने बताया कि महाविद्यालय के बायोटेक्नालाॅजी विभाग द्वारा वन विभाग की आवष्यकता के अनुरूप छत्तीसगढ़ के औषधीय पौधे एवं कीटो का टैक्सोनाॅमिक पहचान कर एक रिपोजिटरी का निर्माण किया जा रहा है। 
उद्घाटन समारोह में उपस्थित महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. एम.ए. सिद्दीकी एवं वरिष्ठ प्राध्यापक डाॅ. ओ.पी. गुप्ता ने बायोटेक्नालाॅजी विभाग द्वारा आयोजित कार्यषाला को विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि कार्यषाला के दौरान विद्यार्थियों द्वारा सीखी गयी जानकारी उनको विषय के नवीनतम ज्ञान से अवगत करायेगी। इस अवसर पर एटीजी लैब पुणे से डाॅ. लौंजेवार तथा उनके तीन सहयोगी उपस्थित थे। कार्यषाला के अंतर्गत विषेष पौधों एवं कीटों का डीएनए पृथक कर उसका एम्पलीफिकेषन किया जा रहा है। इस संबंध में आज प्रायोगिक क्रिया संपन्न हुई। डाॅ. अनिल कुमार द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार कार्यषाला के दूसरे दिन 11 फरवरी को पौधों तथा कीट में उपस्थित विषेष जीन का सेंगर पध्दति से जीन सीक्वेंसींग किया जाने संबंधी प्रषिक्षण दिया जायेगा। इसी प्रकार कार्यषाला के तृतीय एवं अंतिम दिवस 12 फरवरी को 400 से 800 वेस पेपर जीन को जैव सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से पहचान कर पौधें एवं कीटों का वर्गीकरण स्थापित करने संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी प्रतिभागी विद्यार्थियों को दी जावेगी। 
बायोटेक्नालाॅजी विभाग के समस्त शोधार्थी, षिक्षक तथा स्नातकोत्तर छात्र-छात्राऐं इस कार्यषाला के दौरान अपनायी जाने वाली तकनीकों को प्रयोगषाला मंे स्थापित कर इसकी उपयोगिता हेतु रिपोजिटरी (संग्रहण) बनाने हेतु लगातार 3 दिवस कार्यरत रहेंगे। बायोटेक्नालाॅजी विभाग का यह योगदान छत्तीसगढ़ के औषधीय पादप एवं कीटों की जैव विविधता के अध्ययन में बेहद उपयोगी एवं मील का पत्थर सिध्द होगा। 

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