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Photo Gallery: भौतिकी विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय वर्कषाप में पोलैण्ड एवं बेल्जियम के प्राध्यापकों के व्याख्यान से विद्यार्थी प्रभावित

 

भौतिकी विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय वर्कषाप में पोलैण्ड एवं बेल्जियम के प्राध्यापकों के व्याख्यान से विद्यार्थी प्रभावित


Venue : Govt. V.Y.T. PG AUTONOMOUS COLLEGE, DURG
Date : 30/01/2020
 

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शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग में भौतिकी विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय वर्कषाप में आमंत्रित वक्ता के रूप में बेल्जियम के प्रोफेसर डाॅ. डर्क पाॅलमैन, प्राध्यापक घेंट विष्वविद्यालय तथा पोलैण्ड की डाॅ. एम.डी. मारटा के आमंत्रित व्याख्यान से साईंस कालेज, दुर्ग एवं आसपास के महाविद्यालयों के स्नातकोत्तर विद्यार्थी अत्यंत प्रभावित हुए। महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. आर.एन. सिंह तथा कार्यषाला की संयोजक डाॅ. जगजीत कौर सलूजा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि विदेषी प्राध्यापकों के भौतिक शास्त्र के सिध्दांतों के प्रति नजारिया तथा अत्यंत गूढ़ सिध्दांतों को सरल शब्दों में समझानेे को भारतीय विद्यार्थियों ने अत्यंत सराहनीय बताया। डाॅ. पाॅलमैन ने उच्च तरंगदैध्र्य फास्फर पदार्थों तथा उनकी उपयोगिता तथा किस प्रकार उच्च दक्षता वालेे प्रकाष को प्राप्त किया जा सकता है को विस्तार पूर्वक समझाया। उन्होंने आंख की सुग्राहिता को ग्राफ द्वारा भी समझाया। उन्होंने किस प्रकार नीले तथा सफेद प्रकाष उत्र्सक डायोड तथा बचत उर्जा सफेद प्रकाष स्त्रोत में फास्फर मटेरियल की उपयोगिता बताते हुए एम.एन. बेस फास्फर मटेरियल के बारे में बताया।
कार्यषाला के दूसरे दिन पोलैण्ड विष्वविद्यालय की डाॅ. एम.डी. मारटा ने अपने व्याख्यान में डी.आयोनाइजेषन पर केन्द्रित व्याख्यान दिया। महाविद्यालय के प्राध्यापकों एवं उपस्थित विद्यार्थियों द्वारा पूछे गये प्रष्नों का जवाब देते हुए डाॅ. मारटा ने कहा कि भारतीय षिक्षा प्रणाली एवं पोलैण्ड की षिक्षा प्रणाली में काफी भिन्नता है। पोलैण्ड में पक्की नौकरी जैसी कोई नीति नही है। प्रत्येक षिक्षक को उसकी अकादमिक दक्षता के आधार पर नौकरी पर आगे रखा जाता है। किसी षिक्षक द्वारा उच्च दक्षता प्रदर्षन मंे कमी होने पर उसे तत्काल नौकरी से पृथक कर दिया जाता है। इस वजह से पोलैण्ड में हर षिक्षक अपने कर्तव्य के प्रति काफी सजग होता है। हमें अपनी वार्षिक वेतन के बराबर रिसर्च प्रोजेक्ट की राषि विभिन्न संस्थाओं से स्वीकृत करानी पड़ती है। भारतीय विद्यार्थियों द्वारा पूछे गये प्रष्नों की महत्ता पर डाॅ. मारटा ने प्रसन्नता व्यक्त की। साईंस कालेज, दुर्ग के प्राध्यापकों ने प्राचार्य डाॅ. आर.एन. सिंह की उपस्थिति में डाॅ. मारटा से रिसर्च प्रोजेक्ट, षिक्षा पध्दति तथा शैक्षणिक वातावरण पर गहन विचार विमर्ष किया। 
महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. आर.एन. सिंह ने भौतिक विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय कार्यषाला की सराहना करते हुए कहा कि पोलैण्ड एवं बेल्जियम के प्राध्यापकों की उपस्थिति ने सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों में एक नई उर्जा का संचार कर दिया। विद्यार्थियों ने दोनों विदेषी प्राध्यापकों की सादगी एवं कार्य के प्रति निष्ठा की सराहना की। कार्यषाला की संयोजक डाॅ. जगजीत कौर सलूजा एवं भौतिक शास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. पूर्णा बोस ने इस दो दिवसीय कार्यषाला की रूपरेखा बताते हुए कहा कि यह कार्यषाला विद्यार्थियों एवं विदेष से आये हुए वैज्ञानिकों के आपसी परिचर्चा का माध्यम है, जिसका उद्देष्य विद्यार्थियों को सही दिषा देकर उन्हें शोध से जोड़ना है, जिससे देष का भविष्य उज्जवल हो सके। आईसीएफएआई विष्वविद्यालय, रायपुर से आये हुए डाॅ. रवि श्रीवास्तव ने ल्युमिनिसेंस की बारीकी के साथ-साथ इसका वर्तमान दौर में उपयोग कैसे बेहतर तरीके से दिए जा सकते है, इसके बारे में बताया। उन्होंने किस प्रकार से सफेद एलईडी बनायी जा सकती है। इस विषय पर चर्चा की। सेंट थाॅमस महाविद्यालय से अमित कुमार ताम्रकार टैलीस्कोप के बारे में विधिवत बताया। उन्होंने सतह एवं अंतरिक्ष दोनों में उपयोग होने वाली टैलीस्कोप के बारे में बताया। साथ ही साथ उन्होंने भारत और दुनिया के बड़े बड़े टैलीस्कोप की जानकारी दी। डाॅ. स्वागता बेरा ने सायबर क्राइम के बारे में बताया तथा रोबोटिक एवं कृत्रिम प्रावीण्यता की कार्य प्रणाली को समझाया। साथ ही साथ ट्रांसफार्मेर डोमेन से संबंधित जानकारी को भी समझाया। इस अवसर पर बी.एससी प्रथम के लिए वस्तुनिष्ठ प्रतियोगिता में सफल हुये विद्यार्थियों को पुरस्कार के साथ प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया।  भरत कुमार साहू  ने प्रथम, कुषल सलेचा ने द्वितीय, कमल नारायण ने तृतीय, चंद पाल धनकर ने चतुर्थ तथा नीलेष यादव, सेजल शर्मा एवं आयुष गुप्ता ने संयुक्त रूप से पांचवा स्थान प्राप्त किया। मंच का संचालन प्रतीक्षा तिवारी द्वारा किया गया। 
इस अवसर पर डाॅ. पूर्णा बोस, डाॅ. जगजीत कौर सलूजा, डाॅ. अनीता शुक्ला, डाॅ. सीतेष्वरी चन्द्राकर, डाॅ. अभिषेक मिश्रा, डाॅ. प्रषांत श्रीवास्तव, सचिन मिश्रा,  समस्त शोध छात्र के साथ बड़ी संख्या मंे छात्र-छात्राऐं उपस्थित थे।

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