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Photo Gallery: रसायन शास्त्र की इंटरनेषनल कान्फ्रंस का समापन

 

रसायन शास्त्र की इंटरनेषनल कान्फ्रंस का समापन


Venue : Govt. V.Y.T. PG AUTONOMOUS COLLEGE, DURG
Date : 25/01/2020
 

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पर्यावरण संरक्षण हेतु संधृत शोधकार्य के दृढ़ निष्चय के साथ इंटरनेषनल कान्फ्रंस का समापन 

ये उद्गार भिलाई आईआईटी के डायरेक्टर प्रोफेसर रजत मूना ने आज शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग में रसायन शास्त्र विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय इंटरनेषनल कान्फ्रेंस के समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किये। महाविद्यालय के टैगोर हाॅल में बड़ी संख्या में उपस्थित भारतीय एवं बांग्लादेष, चीन, नेपाल, दक्षिण अफ्रीका आदि देषों से पधारे शोधकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रोफेसर मूना ने कहा कि मैं प्रतिभागी शोधकर्ताओं के रचनात्मक शोधकार्य से अत्यंत प्रभावित हुआ। कार्बन फुट पिं्रट की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आज हमारे स्वार्थ के कारण वायुमंडल में प्रदूषण उत्पन्न होकर समूचे पृथ्वी के लिए खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने पर्यावरण में आंषिक परिवर्तन के फलस्वरूप प्राणी जगत पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की विस्तार से चर्चा की। प्रोफेसर मूना ने कहा कि शोधकर्ताओं को हर शोध के दौरान पर्यावरण एवं प्राणी जगत के संरक्षण का विचार ध्यान में रखना चाहिए। बड़ी संख्या में उपस्थित युवा शोधकर्ताओं एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को प्रोफेसर मूना ने पर्यावरण संरक्षण का सबसे बेहतरीन एम्बेसेडर बताया। 
कार्यक्रम में विषिष्ट अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए दुर्ग के संभागायुक्त श्री दिलीप वासनीकर ने रसायन शास्त्र विभाग द्वारा मटेरियल्स फाॅर इन्वायरमेंट विषय पर आयोजित इन्टरनेषनल कान्फ्रेंस को वर्तमान समय की मांग बताते हुए कहा कि हमारी अधिकांष समस्याओं के हल का माध्यम वैज्ञानिक सोच में है। विदेषों से पधारे प्रतिभागी वैज्ञानिकों को छत्तीसगढ़ अंचल की खूबसूरती एवं प्राकृतिक पर्यावरण को देखने का आग्रह श्री वासनीकर ने किया। कार्यक्रम की संचालक डाॅ. भावना जैन ने इंटरनेषनल कान्फ्रेंस की सफलता पर प्रकाष डाला। 
इससे पूर्व कान्फ्रेंस के आयोजन सचिव डाॅ. अजय सिंह ने दो दिवसों के दौरान कान्फें्रस में आयोजित की नोट एड्रेस, आमंत्रित व्याख्यान तथा प्र्रतिभागी युवा वैज्ञानिकों द्वारा पढ़े गये शोधपत्रों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि कान्फ्रेंस के दौरान कुल 02 की नोट एड्रेस प्रोफेसर बी.एस. तोमर, मुबंई तथा प्रोफेसर ए.के. सिंह मुंबई के आयोजित हुये। कुल 13 आमंत्रित व्याख्यानांें में शारदा विष्वविद्यालय, नोयडा के प्रोफेसर एन.बी. सिंह, मुंबई के प्रोफेसर वाय.के.भारद्वाज, दक्षिण अफ्रीका के प्रोफेसर एस.बी. जोनल गड्डा, नेपाल के प्रोफेसर आर. अधिकारी, ढाका बांग्लादेष के प्रोफेसर मोहम्मद सूजन, हैदराबाद के प्रोफेसर एस.पी. सिंह, जबलपुर के प्रोफेसर अनिल वाजपेयी, ढाका बांग्लादेष के प्रोफेसर एम.वाय. अली मोलाह, बिलासपुर के प्रोफेसर जय सिंह तथा चीन के प्रोफेसर अमरीष सिंह आदि के पर्यावरण एवं मटेरियल पर केन्द्रित व्याख्यान शामिल है। युवा वैज्ञानिकों द्वारा कान्फ्रेंस के दो दिवसों के दौरान लगभग 40 शोध पत्र का मौखिक प्रस्तुतिकरण महाविद्यालय के रवीन्द्रनाथ टैगोर सभागार में किया गया। इन युवा वैज्ञानिकों में पोस्ट डाॅक्टेरेट अवार्ड प्राप्त डाॅ. भावना जैन, श्रीमती ज्योति पटेल,इंदौर की स्वाति मेहरा, हैदराबाद के सुरेन्दर, जबलपुर की रष्मि मंडल, रूपा चक्रवर्ती, सुषमा यादव, एस. विद्या सेन, विजय श्री, मनोज बंजारे, नेपाल के भीम एवं सुमीत पंडित आदि के शोधपत्र प्रषंसनीय रहे। कान्फें्रस आयोजन समिति की सहसचिव डाॅ. सुनीता मैथ्यू के अनुसार सर्वश्रेष्ठ मौखिक प्रस्तुतिकरण हेतु प्रथम दिवस के लिए हैदराबाद की टी.श्वेता को प्रथम, जबलपुर के पी.के. विष्वकर्मा को द्वितीय तथा नेपाल के आर.पंडित को तृतीय स्थान से पुरस्कृत किया गया। द्वितीय दिवस के मौखिक प्रस्तुतिकरण हेतु रायपुर की डाॅ. सुनीता सावरिया प्रथम, साईंस कालेज, दुर्ग की सुषमा यादव द्वितीय तथा डाॅ. भावना जैन तृतीय रही। 
आज महाविद्यालय के सभागार में मटेरियल्स फाॅर इन्वायरमेंट विषय पर केन्द्रित लगभग 90 पोस्टरों के माध्यम से शोधकर्ताओं द्वारा किए गए शोधकार्य को प्रदर्षित किया गया था। इन पोस्टरों में सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति के लिए गुजरात की कु. दिव्या पटेल, रायपुर की रीना सूर्यवंषी तथा साईंस कालेज, दुर्ग के दीपेष बासन को प्रथम, भाव नगर की तेजस जोषी तथा साईंस कालेज, दुर्ग की आयषा हासमी को द्वितीय तथा जबलपुर की पल्लवी शुक्ला, नेपाल के नरेष रावत तथा साईंस कालेज, दुर्ग की पूर्णिमा देवांगन को तृतीय स्थान से पुरस्कृत किया गया। एन.आई.टी सूरत के डाॅ. केतन कुबेरकर तथा साईंस कालेज, दुर्ग की प्रगति अग्रवाल ने भी कान्फ्रेंस पर अपने विचार रखें। शोध कार्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान हेतु साईंस कालेज, दुर्ग की 6 शोधकर्ताओं डाॅ. भावना जैन, ज्योति पटेल, रूपा चक्रवर्ती, सुषमा यादव, आयषा हासमी, के. विजय श्री तथा नेपाल के राजेन्द्र जोषी एवं नरेष रावत को आउट स्टैण्डिंग रिसर्च अवार्ड प्रदान किया गया। निर्णायक के रूप में विदेष से पधारे रिसोर्स पर्सन के साथ-साथ कल्याण महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. वाय.आर.कटरे तथा पंडित सुन्दर लाल शर्मा विष्वविद्यालय के डाॅ. डी.एन. शर्मा, घासीदास विष्वविद्यालय के डाॅ. जय सिंह शामिल थे। 
महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. आर.एन. सिंह ने रसायन शास्त्र विभाग की सराहना करते हुए इन्टरनेषनल कान्फ्रेंस के आयोजन को महाविद्यालय के इतिहास में मील का पत्थर करार दिया। डाॅ. सिंह ने कहा कि इन दो दिवसों के दौरान सभी शोधकर्ताओं एवं विषेषज्ञों को एक-दूसरे के शोधकार्य को जानने एवं समझने का अच्छा अवसर मिलने के साथ-साथ रसायन विषय से संबंधित नवीनतम जानकारी भी प्राप्त हुई। अब हमारे युवा शोधकर्ता अपने शोधकार्यों में देष विदेष के वैज्ञानिकों द्वारा दी गयी नवीनतम जानकारी का समावेष करने का प्रयास करेंगे। कान्फ्रेंस की संयोजक डाॅ. अलका तिवारी ने अपने उद्बोधन में कहा कि देष-विदेष के वैज्ञानिकों के विचार-विमर्ष से हमारे अंचल के युवा शोधकर्ताओं में एक नयी ऊर्जा का संचार हुआ है। कान्फ्रेंस की चेयरपर्सन डाॅ. अनुपमा अस्थाना ने युवा शोधकर्ताओं से आव्हान किया कि किसी भी पदार्थ के रूपांतरण से पहले हम पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों का अध्ययन करें। डाॅ. अस्थाना ने नैनो मटेरियल का उदाहरण दिया। 
कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य डाॅ. आर.एन. सिंह ने अतिथियों को बस्तर आर्ट पर आधारित स्मृति चिन्ह प्रदान कियें। कान्फ्रेंस के आयोजन सहसचिव डाॅ. अजय पिल्लई ने धन्यवाद ज्ञापन किया। 

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