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शोध कार्य को प्रयोगषाला से बाहर लाकर सामाजिक हित में उपयोग करें - डाॅ. ए.के. सिंह


Venue : Govt. V.Y.T. PG AUTONOMOUS COLLEGE, DURG
Date : 24/01/2020
 

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शोध कार्य को प्रयोगषाला से बाहर लाकर सामाजिक हित में उपयोग करना वर्तमान समय की आवष्यकता है। आजकल किसी भी पदार्थ का बिना लक्ष्य के उपयोग समाज एवं पर्यावरण हेतु हानिकारक सिध्द हो रहा है। 3 डी प्रिटिंग हेतु मटेरियल का प्रयोग हो रहा है। हमें किसी भी शोध कार्य के निष्कर्ष पर पहुंचने के पूर्व इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वह समाज एवं पर्यावरण के हित में हो। ये उद्गार डाॅ. ए.के. सिंह, डायरेक्टर राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर लिमिटेड, मुंबई ने आज शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग में व्यक्त किये। डाॅ. सिंह आज महाविद्यालय के रसायन शास्त्र विभाग द्वारा आयोजित मटेरियल्स फाॅर इन्वायरमेंट विषय पर दो दिवसीय इन्टरनेषनल कान्फें्रस में मुख्य अतिथि के रूप में अपने उद्गार व्यक्त कर रहे थे। डाॅ. सिंह ने बांग्लादेष, नेपाल, चीन, साउथ अफ्रीका तथा भारत के विभिन्न राज्यों से पधारे शोधकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि 21वीं सदी में ऊर्जा, स्वास्थ्य, जल, पर्यावरण, वायु आदि को स्वच्छ रखना प्रमुख चुनौतियां है। इस प्रकार के आयोजनों से अनेक महत्वपूर्ण निष्कर्ष निकलते है तथा विद्यार्थियों का सोचने का नजरिया बदलता है। 
इससे पूर्व सरस्वती वंदना एवं सरस्वती पूजन तथा इसके पश्चात् छत्तीसगढ़ प्रदेष के राज्य गीत अरपा पैरी की धार के गायन के साथ प्रारंभ हुए उद्घाटन कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत प्राचार्य डाॅ. आर.एन. सिंह, चेयरपर्सन डाॅ. अनुपमा अस्थाना, संयोजक डाॅ. अलका तिवारी, आयोजन सचिव डाॅ. अजय सिंह ने किया। कार्यक्रम में विषिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र के पूर्व निदेषक तथा राजा रमन्ना फेलोषिप प्राप्त डाॅ. बी.एस. तोमर ने कहा कि सोसायटी के हित में हमें किसी भी शोध कार्य के आरंभ से ही विचार करना चाहिए। हमें प्रयोगषाला से शोध कार्य को फील्ड में ले जाकर समाज के हित में इसका उपयोग करना होगा। उन्होंने कहा कि बार्क का उद्देष्य सदैव समाज हित रहा है। डाॅ. तोमर ने कहा कि साईंस कालेज, दुर्ग में रसायन शास्त्र विभाग को शोध कार्य हेतु भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र ने शोध परियोजना आबंटित की है। 
कार्यक्रम में विषिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित हेमचंद यादव विष्वविद्यालय, दुर्ग की कुलपति डाॅ. अरूणा पल्टा ने कहा कि खनिज संपदा से पूर्ण छत्तीसगढ़ में खनिजों के संधृत विकास की नितांत आवष्यकता है। इन्टरनेषनल कान्फे्रेंस का मुख्य विषय वर्तमान समय की मांग है। साईंस कालेज, दुर्ग द्वारा समाज के हित में निरन्तर आयोजित की जा रही रचनात्मक गतिविधियों एवं शोध कार्यों की सराहना करते हुए डाॅ. पल्टा ने इसे छत्तीसगढ़ प्रदेष का उत्कृष्ट महाविद्यालय करार दिया। महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. आर.एन. सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि महाविद्यालय में इंटरनेषनल कान्फ्रेंस का आयोजन शोधार्थियों एवं महाविद्यालय के युवा प्राध्यापकों के लिए नई ऊर्जा का संचार करेेगा। डाॅ. सिंह ने कहा कि किसी भी पदार्थ के निर्माण में छोटा सा परिवर्तन पर्यावरण पर वृहद रूप से प्रभाव डालता है। कभी-कभी यह प्रभाव हमेें तुरंत दिखाई देता है तथा कभी इसके परिणाम कुछ समय पश्चात् दिखाई देते है। इस संबंध में डाॅ. सिंह ने डीडीटी कीटनाषक का उदाहरण दिया। 
सेमीनार की संयोजक डाॅ. अलका तिवारी ने कार्यक्रम के आरंभ में सेमीनार की प्रासंगिकता पर प्रकाष डालते हुए कहा कि यह इंटरनेषनल कान्फ्रेंस पर्यावरण से संबंधित शोधकार्य करने वाले शोधार्थियों के लिए एक प्लेटफार्म प्रदान करेगी, जिसमें इंटरनेषनल वैज्ञानिकों के साथ विचार-विमर्ष एवं उनके द्वारा किए गए शोधकार्यों को जानने का अवसर युवा शोधकर्ताओं को प्राप्त होगा। कान्फे्रंस की चेयरपर्सन डाॅ. अनुपमा अस्थाना ने सभी प्रतिभागियांे का स्वागत करते हुए कहा कि इस कान्फें्रस में आमंत्रित व्याख्यान के साथ-साथ शोधार्थी 5 विभिन्न तकनीकी सत्रों में अपने शोधपत्र प्रस्तुत करेंगे। प्रतिभागियों के शोध कार्याें पर आधारित पोस्टर प्रस्तुतिकरण कल 25 जनवरी को होगा। आयोजन सचिव डाॅ. अजय सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि यह सेमीनार महाविद्यालय के इतिहास में मील का पत्थर सिध्द होगा। 
आज कान्फ्रेंस के प्रथम दिन आयोजित तीन तकनीकी सत्रों में लगभग 30 से अधिक शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किये। महाविद्यालय के रवीन्द्रनाथ टैगोर सभागार में आयोजित प्रथम तकनीकी सत्र में बार्क मुंबई के प्रोफेसर बी.एस. तोमर तथा मुंबई के ही प्रोफेसर ए.के. सिंह ने आमंत्रित व्याख्यान दिये। द्वितीय तकनीकी सत्र में शारदा विष्वविद्यालय, नोयडा के प्रोफेसर एन.बी. सिंह, मुंबई के प्रोफेसर वाय.के. भारद्वाज ने पर्यावरण से संबंधित मटेरियल्स पर अपने व्याख्यान प्रस्तुत किये। तकनीकी सत्रों की अध्यक्षता बांग्लादेष प्रोफेसर एम.वाय. अली मुलाह तथा नेपाल के प्रोफेसर आर.अधिकारी ने की। तृतीय तकनीकी सत्र में अध्यक्षता दक्षिण अफ्रीका के प्रोफेसर एस.बी. जोनाल गड्डा ने तथा सह संयोजक के रूप मंे डाॅ. एस.पी. सिंह उपस्थित थे। इस सत्र में नेपाल के प्रोफेसर आर. अधिकारी तथा ढाका बांग्लादेष के प्रोफेसर मोहम्मद ए.बी.एच. सूजन ने अपना आमंत्रित व्याख्यान दिया। कार्यक्रम का संचालन रसायन विभाग की पोस्ट डाॅक्टरेट छात्रा डाॅ. भावना जैन ने किया। समारोह में उपस्थित प्रत्येक अतिथि को महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. आर.एन. सिंह ने बस्तर आर्ट पर आधारित स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया। उद्घाटन समारोह में साईंस कालेज, दुर्ग के समस्त प्राध्यापकों के अलावा कल्याण महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. वाय. आर. कटरे, सुन्दर लाल शर्मा ओपन युनिवर्सिटी के क्षेत्रीय निर्देषक डाॅ. डी.एन. शर्मा एवं अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। 
प्रतिभागियों के सम्मान में साईंस कालेज, दुर्ग के विद्यार्थियों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें विद्यार्थियों ने माता दुर्गा की स्तुति पर आधारित समूह नृत्य, एकल नृत्य, एकल गायन एवं समूह गायन प्रस्तुत किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम का संचालन एम.एससी रसायन शास्त्र के विद्यार्थी आषीष देवांगन ने किया।

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